प्रियंका गांधी वाड्रा को अक्सर सक्रिय राजनीति में लाने की मांग कांग्रेस कार्यकर्ता करते रहे हैं। हालांकि इसे लेकर जब भी गांधी परिवार या प्रियंका से सवाल किए गए तो वह इसे टाल गए और कभी भी यह स्पष्ट नही किया कि प्रियंका सक्रिय राजनीति में कभी आएंगी या नही। यह तो सभी जानते हैं कि पर्दे के पीछे सोनिया के अध्यक्ष रहते या अब राहुल के अध्यक्ष बनने के बाद कई अहम मौकों पर प्रियंका ने कमान संभाली है। अपनी सूझबूझ और राजनीतिक समझ से कई जटिल मुद्दों पर उन्होंने परिवार और पार्टी का साथ दिया है। खास कर रायबरेली और अमेठी जहां से क्रमशः सोनिया और राहुल चुनाव लड़ते हैं वहां की कमान प्रियंका खुल कर संभालती हैं। ऐसे में कार्यकर्ताओं के मन भी यही सवाल उठता है कि क्या प्रियंका मोदी के सामने राहुल से बढ़िया विकल्प साबित होतीं?


कांग्रेस के कार्यकर्ता भी कई बार खुल कर तो कभी दबे जुबान से यह मान चुके हैं कि राहुल से अच्छी राजनीतिक समझ प्रियंका की है। यूपी चुनाव के समय सपा से गठबंधन में अहम योगदान निभाना हो या लोकसभा चुनाव के दौरान अमेठी में स्मृति ईरानी को हराने के लिए राहुल के पीछे खड़ा रहना, प्रियंका हमेशा आगे रहीं। हालांकि कई लोग या जानकार यह भी मानते हैं कि प्रियंका अगर राजनीति में सक्रिय हुईं तो राहुल पीछे राह जाएंगे जो सोनिया गांधी कभी नही चाहेंगी। इसके अलावा प्रियंका की तुलना कभी-कभी इंदिरा गांधी से की जाती है और वह राहुल की अपेक्षा अधिक लोकप्रिय भी हैं। ऐसे में बेशक वह एक बेहतर विकल्प हैं। हालांकि इस पर अंतिम फैसला कांग्रेस और प्रियंका सहित उनके परिवार को लेना है।