राहुल गांधी के बारे में कहा जाता है कि वह राजनीति के प्रति सीरियस नही रहते हैं। यही वजह है कि उनके बयान की वजह से पार्टी को क़भी-कभी असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है। हालांकि हाल के दिनों की बात करें तो अध्यक्ष बनने के बाद से राहुल में कई बदलाव देखने को मिले हैं। फिर वह बात मुद्दों को उठाने की हो या जोश और उत्साह के साथ आक्रामकता से मोदी सरकार और मोदी के खिलफ हल्ला बोलने की राहुल का अंदाज़ जुदा जुदा है। यह अंदाज़ न सिर्फ उनकी छवि बदलने वाला साबित हो रहा है बल्कि इसके नतीजे भी आने वाले समय मे सुखद होंगे ऐसा माना जा रहा है।


राहुल ने भी शायद अब मान लिया है कि सौम्य और शांत रहने से राजनीति में अब काम नही चलने वाला है।  वह दौर पुराना था और यह दौर उससे बिल्कुल अलग है। यही वजह है कि उन्होंने सबसे पहले खुद में बदलाव लाने का यह फार्मूला आजमाया है। यह फार्मूला पहली बार उनके अमेरिका और बहरीन दौरे पर दिखा था जब वह पूरी आक्रामकता के साथ मोदी की नीतियों पर हमला बोलते नजर आए थे। इसके अलावा उसके बाद भी वह मलेशिया, सिंगापुर और देशभर अंदर भी उसी स्टैंड पर कायम नजर आए। लोगों के साथ मीडिया में भी राहुल का यह बदला अंदाज़ लोगों को खूब भाया, साथ ही अब तो विरोधी भी उनके इस रुख को देखते हुए गंभीरता से लेने लगे हैं।