भारत की आज़ादी के बाद के इतिहास को पलट कर देखा जाए तो लगातार एक ही दल और एक ही परिवार की बात होती है। यह दल है कांग्रेस और गांधी का परिवार है। गांधी से तात्पर्य नेहरू के बाद इंदिरा, संजय, राजीव,सोनिया एयर अब राहुल गांधी से है। आजकल पीएम मोदी भी इस तथ्य की चर्चा हर बात में करते हैं। नेहरू से होती शुरुआत मनमोहन तक आती है। उसके बाद नामदार और गांधी परिवार पर बहुत कुछ कह जाती है।

इन सब के बीच हाल ही में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव सम्पन्न हुए। इन चुनावों के बाद सब के अपने आकलन और अनुमान है। एक उम्मीद है कांग्रेस की वापसी की और एक आकलन है बीजेपी के सत्ता में वापसी का, हालांकि यह कितना सही या गलत होगा यह आगामी 11 दिसंबर को पता चलेगा।

चुनावों में वादे हुए, इरादे दिखाए गए, 70 साल बनाम 4 साल की बातें हुईं, कहीं धर्म और कहीं जाति पर चर्चा हुई। भद्रता की सीमा को तोड़ अभद्रता चरम पर दिखी, हालांकि इन सब के बीच एक बात आम रही वह यह कि विकास से ज्यादा हर दल ने जाति-सम्प्रदाय और उन तमाम मुद्दों पर बात की जिनका आम जनता की जिंदगी से शायद ही कोई लेना देना है।

मसलन न विकास न शिक्षा, न सड़क, न पानी ,न बिजली और न ही स्वास्थ्य की बात हुई। खैर राजस्थान में पांच साल वसुंधरा राजे का राज रहा, एमपी में शिवराज का राज रहा लेकिन इस बार के चुनाव उपलब्धियों पर न लड़े गए न विपक्ष ने नाकामियों के बाजे बजाए। इस चुनाव बस व्यर्थ की बातें हुईं। अंजाम 11 दिसंबर को पता चलेगा।

बीजेपी और कांग्रेस दोनो के लिए यह चुनाव नाक का सवाल थे। 2019 से पहले इसे सत्ता का सेमीफाइनल माना जा रहा था। इन चुनावों में सत्ता विरोधी लहर के हावी होने की संभावना प्रबल थी। यह नजर भी अब आ रही है। यह बीजेपी के खिलाफ जाएगी यह तो सब जानते हैं कइनकी सत्ता में मिजोरम और तेलंगाना को छोड़ दें तो तीन राज्यों में बीजेपी की सरकार थी। तेलंगाना और मिजोरम में बीजेपी नगण्य थी। इसके बावजूद मिजोरम से संकेत सुखद हैं। तेलंगाना में भी बीजेपी नंबर तीन है। बीबीसी की रिपोर्ट ऐसा कहती है। खैर 11 दिसंबर के इंतजार है। आप भी कीजिये हम भी करते हैं।