भारत और पाकिस्तान के तल्ख रिश्ते जगजाहिर हैं। यह भी पूरी दुनिया मे ज्ञात है कि पाक जहां आतंक का आका है वहीं भारत आतंकवाद से सर्वाधिक पीड़ित देश है। अमेरिका और अफगानिस्तान से लेकर विश्व के अंदर ऐसा कोई देश नही है जो पाक की इस छवि को स्वीकार करने से इनकार करता आया है। हालांकि यह बात अलग है कि खुद पाकिस्तान साम,दाम,दंड और भेद जैसे हर उपाय से भारत से जितने की कवायद जारी रखना चाहता गई। इसी क्रम में जबकि पाक में नई सरकार का गठन हुआ है,उम्मीद थी कि भारत-पाक के रिश्ते सामान्य होंगे। हालांकि यह हो न सका और इमरान खान की सरकार में भी सीमा पार से साजिशें बदस्तूर जारी रहीं।

अब इसी मामले में इमरान खान का बड़ा बयान सामने आया है। इस बयान की बात करें तो इमरान ने कहा है कि 2019 के बाद वह नए सिरे से बातचीत पर विचार करेंगे। इस बयान के बाद यह साफ है कि इमरान खान भारत मे 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों में बदलाव की उम्मीद जगाए बैठे हैं। यह तो भविष्य के गर्भ में है कि उनका सपना किस हद तक पूरा होगा लेकिन इतना तय है कि मोदी के सामने इमरान की एक नही चल रही। इसकी तस्दीक खुद पाकिस्तानी घुसपैठ के आंकड़े कर रहें हैं। अब तक सैकड़ों घुसपैठिये मारे गए। आतंकी हमलों में कमी आई है। ऐसे में क्या इस सोच कर पीछे इमरान की यही नीति है?

रियाद में फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनीशियेटिव फोरम को संबोधित करते हुए इमरान ने कहा कि पाकिस्तान अपने सभी पड़ोसियों और खासकर भारत और अफगानिस्तान के साथ शांति चाहता है। सरकारी रेडियो पाकिस्तान ने खान के हवाले से कहा, ‘भारत के साथ शांति से दोनों देशों को शस्त्र स्पर्धा में लिप्त होने के बजाय अपने संसाधनों का उपयोग मानव विकास के लिए करने में मदद मिलेगी।’ उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने भारत से बातचीत की कोशिश की लेकिन भारत ने प्रस्ताव ठुकरा दिया। इज़के अलावा उन्होंने 2019 में भारत मे सत्ता परिवर्तन की बात कहते हुए कहा कि हम बदलाव के बाद फिर कोशिश करेंगे। हालांकि इस बीच कभी भी उन्होंने पाकिस्तान के कारनामों का जिक्र नही किया न ही यह बताने में दिलचस्पी दिखाई की भारत ने यह प्रस्ताव क्यों ठुकराए।