राजनीति

पाकिस्तान के पास जरूरी खर्च के लिए भी नही बचे पैसे, मदद मांगने यहां पहुंचा

पाकिस्तान में सत्ता का परिवर्तन हाल ही में हुआ है। इस सत्ता परिवर्तन के दौर में नवाज शरीफ की पार्टी को पीछे छोड़ पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेट कप्तान अब सुपरपावर बन चुके हैं। वह अब पीएम हैं। हालांकि वह भी जानते है कि उनके सर पर यह ताज कांटों भरा है। इसके पीछे दो वजहें हैं। पहली वजह यह कि वह सेना के बलबूते इस कुर्सी पर पहुंचे हैं। यह बात पूरी दुनिया मे विदित है कि पाक की सत्ता में जो भी सेना भरोसे पहुंचा उसका अंजाम क्या रहा और आगाज़ क्या रहा। दूसरी यह कि इमरान का तो आगाज ही ऐसा हुआ है जिसकी उन्होंने कल्पना भी नही की थी। कहने का मतलब पाकिस्तान की अर्थव्यस्था से है। देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह कर्ज के जाल में फंसी और उलझी हुई है। इज़के अलावा न कोई विकल्प इससे उबरने का दिख रहा है न ही अमेरिका और अन्य वित्तीय संस्थाएं अब पहले की तरह उसकी मददगार रही हैं।

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इसी क्रम में पाक के प्रधानमंत्री ने कुछ कदम उठाए हैं। इन कदमों में खर्चे में कटौती और भैंसें और कार तक कि नीलामी शामिल है। इसके अलावा अब वह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से यह अर्जी लगा रहे हैं कि पाक को बेल आउट पैकेज दिया जाए। हालांकि अमेरिका का ट्रम्प प्रशासन इस बात से इनकार करता रहा है। उसने खुद पाक की गतिविधियों पर न सिर्फ नजर रखना शुरू किया है बल्कि सभी संस्थाओं से उसे किसी भी तरह की आर्थिक और वित्तीय सहायता देने से मना भी किया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि पाक का अब सहारा कौन बनेगा? क्या अमेरिका को नाराज करने का जोखिम कोई देश या संस्था लेगा?

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आपको बता दें कि पाकिस्तान भारी-भरकम कर्जे के जाल में उलझा हुआ है। उसे बड़े पैमाने पर आर्थिक मदद की दरकार है। यही वजह है कि वह अब आईएमएफ के पास पहुंचा है। माना जा रहा है कि पाकिस्तान को फिलहाल नौ अरब डॉलर (66 हजार करोड़ भारतीय रुपये) की आर्थिक मदद की जरूरत है। यह फैसला इमरान की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया। हालांकि पाकिस्तान के पास यही एक विकल्प भी तंग। ऐसा इसलिए है क्योंकि आर्थिक मदद की उम्मीद में इमरान सऊदी अरब के किंग से मिल चुके हैं लेकिन वहां से नाकामी हाथ लगी। ऐसे में अब आईएमएफ का पाक के प्रति क्या रुख रहता है यह देखने वाली बात है। इतना तय है कि अपनी जरूरी खर्चे के लिए जूझते पाकिस्तान के लिए यह महत्वपूर्ण है और अगर अमेरिका के दवाब में आईएमएफ इनकार करता है तो पाकिस्तान के लिए मुश्किलों का नया दौर शुरू होगा।

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