राजनीति में किसी भी संभावना से कभी इनकार नही किया जा सकता है। खास कर जब बात उत्तर भारत और बिहार,यूपी जैसे राज्यों की होती है। यह राजनीति और लोकतंत्र की खूबसूरती भी हो सकती है और इसका स्याह पन्ना भी। वह ऐसे की कभी उम्मीदें गठबंधन की करवट लेती नजर आती हैं तो एक झटके में कभी सब कुछ बिखेर जाती हैं। ऐसा ही एक बार फिर हुआ है। वह हुआ है महज एक इंटरव्यू के बाद। एक निजी समाचार चैनल द्वारा इसके प्रसारण के बाद जहां देश की दलगत राजनीति में बड़ा मोड़ आता दिख रहा है वहीं दूसरी तरफ गठबंधन बना मोदी और बीजेपी की राह रोकने की कोशिश में लगे विपक्ष को बड़ा झटका लगा है।

2019 लोकसभा चुनावों और कुछ राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर यह घटनाक्रम अहम साबित हो सकता है। दरअसल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के एक इंटरव्यू ने सियाशी गलियारों में तूफान खड़ा कर दिया है। उनके बयान के बाद जहां बसपा सुप्रीमो मायावती ने कांग्रेस-बसपा गठबंधन की किसी भी संभावना से इनकार कर दिया है वहीं बीजेपी को अप्रत्यक्ष तौर पर फौरी राहत भी दे दी है।

आपको बता दें कि दिग्विजय ने अपने बयान में कहा था कि मायावती पर केंद्र सरकार का काफी दबाव है। वह सीबीआई और ईडी जैसी एजेंसियों के कार्रवाई में तेजी लाने को लेकर डरी हुई है। यही वजह है कि वह कांग्रेस से गठबंधन नही चाहती हैं। हालांकि बाद में मायावती ने इसका जोरदार खंडन किया और कहा कि बसपा संघर्षों से निकली हुई पार्टी है। हमें किसी का डर या दबाव नही है। साथ ही उन्होंने दिग्विजय सिंह पर गठबंधन में रोड़ा बनने का आरोप लगाया। इन सब के बीच गठबंधन के अगुवा रहे अखिलेश भी अब वेट एंड वाच के मूड में हैं और मैनेजमेंट संभालने में लगे हैं। हालांकि अब देखना है कि ऐसी तल्ख बयानबाजी के बीच गठबंधन का अंजाम क्या होता है?
संदर्भ-एबीपी न्यूज़