राफेल डील सरकार और विपक्ष के साथ फ्रांस के लिए भी एक बड़ा सरदर्द साबित हो रही है। सरकार जहां बदनामी से डर रही है वहीं विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा और घोटाला बता मुद्दे तलाशने में तुला है। फ्रांस सरकार का सरदर्द इस वजह से बढ़ा हुआ कहा जा सकता है क्योंकि वहां के पूर्व राष्ट्रपति ने जहां भारत सरकार से अलग बयान दिया,वहीं वर्तमान नेतृत्व इस बात से उलझन में है कि कहीं यह विवाद भारत-फ्रांस के रिश्ते में खटास की एक वजह न बन जाए।

खैर यह सब बातें अब तक इस विवाद से निकलकर सामने आ चुकी है। हालांकि आज जो बयान आया है वह काफी बड़ा है और एक बड़े नेता का है। इसकी अहमियत तब और बढ़ जाती है जब वह कांग्रेस के पूर्व सहयोगी रहे हैं।

इससे पहले कि हम आपको बताएं कि कौन है वह नेता और उन्होंने क्या और कब कहा है,उससे पहले यह बताना आवश्यक है कि कैसे यह बयान अहम है? इस बयान की अहमियत इसलिए आज के समय अनुसार काफी ज्यादा है क्योंकि कांग्रेस के वह विश्वस्त सहयोगी रहे हैं। वह मनमोहन सरकार में शामिल मंत्री रहे हैं और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सुप्रीमो हैं। जी हां वह नेता हैं शरद पवार। 

पवार ने आज एक मराठी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि निजी तौर पर मुझे या किसी को भी कम से कम पीएम मोदी की नीयत पर शक नही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार के सफाई देने से कंफ्यूजन बढ़ेगा न कि मामला स्पष्ट होगा। ऐसे में किसी को भी इससे होने वाले नुकसान को समझना चाहिए। पवार का यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब महाराष्ट्र में कांग्रेस-रांकपा गठबंधन की बातें चर्चा का विषय है। ऐसे में देखना है इस बयान का क्या अंजाम निकलता है। हालांकि इस बयान से इतना तय जरूर है कि मोदी सरकार और बीजेपी को कांग्रेस कुनबे के एक बड़े नेता का समर्थन तो मिल ही गया है।