दुनिया मे ऐसे कई देश हैं जो अपनी छोटी-बड़ी हर तरह की जरूरतों के लिए भारत पर आश्रित हैं। इनमे कई ऐसे हैं जो भारत के साथ और भारत उनके साथ खड़े भी नजर आते हैं। हालांकि इनमे से ही कुछ देश ऐसे हैं जहां सत्ता परिवर्तन या अलग-अलग वजहों और दबावों की वजह से भारत को आंख भी दिखाई जाती है।

अगर कुछ उदाहरण की बात करें तो नेपाल, मालदीव और श्रीलंका जैसे ऐसे कई देश हैं जो अपनी सुरक्षा, खाद्य पदार्थों और दवाई जैसी जरूरतों के लिए पूरी तरह भारत पर निर्भर हैं। हालांकि यह भी उतना ही सच है कि यह छोटे देश अपने सामरिक महत्व को समझते हुए पाला बदलते भी देर नही लगाते। ऐसी ही एक देश की कहानी आज हम आपको बताएंगे।

यह देश जिसकी हम बात कर रहे हैं, वह भारतीय सीमा से महज 400 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहाँ राजनीतिक उठापटक पिछले कुछ सालों में काफी तेज रही है। ऐसी ही एक खबर अब से चार महीने में पहले आई थी। इस खबर ने भारतीय नेतृत्व सहित उस देश मे काम कर रहे कामगारों को संकट में डाल दिया था।

खबरों के मुताबिक इस देश ने तब भारतीय कामगारों को बिजनेस वीजा और वर्क परमिट जारी करना बंद कर दिया है। यह टैब हुआ था जब कुछ भारतीय कामगार छुट्टी पर भारत आए थे और जब काम पर वापस लौटने की कोशिश की, तो उनके लिए ऐसा करना मुश्किल हो गया। ऐसे खबरें थीं कि भारतीय कर्मचारियों का वीजा रीन्‍यू ही नहीं किया जा रहा था। 

जिस देश की हम बात कर रहे हैं यह देश है मालदीव। मालदीव में अभी चुनावी नतीजे आये हैं। इन नतीजों में इब्राहिम मोहम्मद सोलिह को जीत हासिल हुई, वहीं भारत के प्रति विरोध का रवैया रखने वाले प्रेसिडेंट अब्दुल्ला यामीन को जनता ने नकार दिया। यह खबर भारत और भारतीय कामगारों के लिए राहत भरी है। इन चुनावों पर भारत की करीबी नजर थी।

यहां बड़ी संख्या में मतदान दर्ज किया गया। हालांकि जब भारत ने अपने कामगारों को वीजा न देने का विरोध दर्ज कराया था तब मालदीव ने गोलमोल जवाब दिए लेकिन उसका रवैया भारत के प्रति उदासीन नजर आया था। उम्मीद है नई सरकार के आने के बाद रिश्तों में फिर से गर्मजोशी देखने को मिलेगी।