मायावती के इस कदम से टूटा कांग्रेस का सपना, गठबंधन पर भी संदेह

केंद्र की मोदी सरकार और बीजेपी के खिलाफ विपक्षी एकता की बात समय-समय पर उठती रही है। कई दल कई मौकों पर अपनी तथाकथित एकता का प्रदर्शन करते और ताकत दिखाते भी नजर आए हैं। हालांकि जितनी बार एकता दिखी उससे कहीं ज्यादा मनमुटाव और बिखराव नजर आया।

दम्भ तो एकता का लगातार भरा गया लेकिन अभी तक कोई ऐसा सकारात्मक कदम किसी भी दल की तरफ से नही उठाया गया जिससे कहा जा सकता है कि बीजेपी के खिलाफ महागठबंधन एक विकल्प पूरे देश मे बन सकता है। खैर अब आइये जानें कि हम ऐसा क्यों कह रहे हैं कि मायावती के एक कदम से कांग्रेस का सपना टूटा और अब महागठबंधन पर भी संकट के बादल छाए दिख रहे हैं।

दरअसल जल्द ही राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में राज्य विधानसभा चुनाव होने हैं। इसको लेकर तैयारियां,आरोप-प्रत्यारोप और गठबंधन की बातें शुरू हो गई हैं। कभी भी तारीखों का ऐलान हो सकता है। ऐसे में यूपी में साथ आये बसपा,सपा,कांग्रेस से उम्मीद थी कि वह छतीसगढ़ और मध्यप्रदेश में भी एक नजर आएंगे। हालांकि मायावती ने कांग्रेस का साथ इन दोनों राज्यों में छोड़ने का ऐलान कर दिया। उन्होंने एमपी में अकेले चुनाव लड़ने की बात कही,वहीं छत्तीसगढ़ में वह पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के साथ गठबंधन कर गईं और कांग्रेस देखती रह गई।

बसपा सुप्रीमो का कहना था कि सम्मानजनक सीटें मिलेंगी तभी बात बनेगी। अजीत जोगी मौके का फायदा उठाने में सफल रहे,ऐसे में अब 55 सीटों पर अजीत जोगी और 35 सीटों पर मायावती के उम्मीदवार चुनावी चुनौती पेश करते नजर आएंगे। एमपी के लिए भी मायावती ने 22 उम्मीदवारों के नाम का एलान कर दिया है। खैर बाकी इस बाजी में जीत किसके हाथ लगेगी और किसको फायदा किसको नुकसान होगा यह तो नतीजों के आने के बाद ही पता लगेगा।

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