पाकिस्तान में नई सरकार के गठन के बाद भी ऐसा नही लगता कि मुसीबतें उसका पीछा छोड़ने को तैयार हैं। यह सर्वविदित है कि इमरान भी सेना के ही भरोसेमंद बन सत्ता में बैठे हैं लेकिन इसके बावजूद जिस तरह पहले अमेरिकी सहायता रद्द हुई और अब आर्थिक हालात बन रहे हैं। ऐसे में यही कहा जा सकता है कि इमरान के सिर पर कांटों भरा ताज रखा गया है। हालात ऐसे हैं कि खुद पीएम यह कबूल कर चुके हैं कि पाक कर्ज के जाल में उलझ चुका है। उन्होंने इससे निपटने के उपाय सुझाते हुए कहा कि फिजूलखर्ची पर रोक लगा कर ही इससे उबरा जा सकता है। यही वजह है कि सरकार ने इसकी तैयारियां भी पुख्ता तौर पर शुरू कर दी है।

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पाकिस्तान की आर्थिक हालात का अंदाज़ा इस बात से सहज ही लगाया जा सकता है कि उसके ऊपर 30,000 अरब रुपये का कर्ज है। उसके पास फिलहाल न तो अमेरिकी सहायता का सहारा है न ही वर्ल्ड बैंक की तरफ से कोई बेल आउट पैकेज की उम्मीद ही नजर आ रही है। हास्यास्पद तो यह लगता है कि इस कर्ज से निपटने के लिए जो कदम उठाए जा रहे हैं उसके तहत पीएम हाउस की भैंसें और महंगी लक्जरी कारें नीलाम करनी पड़ रही है। खैर यह देखने वाली बात होगी कि इस प्रक्रिया से पाकिस्तान को अपने कर्ज से निपटने में कितना सहयोग मिलता है। हालांकि इन सभी बातों के बीच यह तय है कि पाकिस्तान के आर्थिक हालात बेहद खराब हैं और आतंक के लिए अपनी पहचान रखने वाला यह देश अब बुरी तरह उलझ चुका है।