कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इन दिनों जर्मनी और ब्रिटेन के चार दिवसीय दौरे पर हैं। राहुल गांधी का विदेश दौरा हो और वह विवादों में न घिरें ऐसा बहुत कम ही हुआ है। इस बार तो विवाद की शुरुआत उनके देश से निकलते ही हो गई।

जैसे ही राहुल की तस्वीर सामने आई वैसे ही विरोधी दलों के नेताओं के साथ आम लोग भी उनपर टूट पड़े। वजह यह बताई गई कि जब केरल बाढ़ में डूबा है तब राहुल देश से बाहर घूमने जा रहे हैं। खैर यह कोई तर्क नही कहा जा सकता क्योंकि राहुल न तो सत्ता में हैं न ही मदद करने की स्थिति में हैं। 

अब बात उनके बयानों की करें तो जर्मनी में जहां उन्होंने मोदी सरकार पर जोरदार हमला बोला वहीं आरएसएस की तुलना मुस्लिम ब्रदरहुड से कर बैठे। राहुल ने मुद्दे सही उठाये या गलत इसको देखने का नजरिया सभी का अलग-अलग हो सकता है लेकिन एक सवाल सभी के मन मे है कि आखिर देश के अंदर रहते हुए राहुल यही मुद्दे क्यों नही उठाते? क्यों उनकी सुई किसी एक ही मुद्दे पर अटक जाती है? इसका जवाब बहुत मुश्किल नही है।

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि राहुल की तुलना पीएम मोदी से है, वह कांग्रेस की तरफ से पीएम पद के उम्मीदवार भी माने जाते हैं। ऐसे में कहीं न कहीं वह भी अपनी एक अंतरराष्ट्रीय छवि विकसित करना चाहते हैं। यह तो हुई पहली वजह। दूसरी वजह यह है कि वह पीएम की तरह ही देश के मुद्दों को दुनिया के मंचों से उठा कर उनके ही तरीके से उनका विरोध करना चाहते हैं।

इसके अलावा इस बार खास बात यह रही कि बेशक राहुल का मजाक उड़ा और उनके बयानों पर विवाद हुआ लेकिन राहुल ने शायद पहली बार भारतीय पत्रकारों से लंदन में बातचीत की। यह समझ से थोड़ा परे था। ऐसा इसलिए है क्योंकि राहुल यह बातचीत भारत मे एक खुले मंच या प्रेस कॉन्फ्रेंस से करते तो शायद इसका प्रभाव ज्यादा होता। खैर यह किसी न किसी रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है लेकिन इतना तय है कि अभी रणनीति में और राहुल में कई अन्य बदलाव की जरूरत है।