असम में नेशनल रजिस्टर फ़ॉर सिटीजन के प्रकाशन के बाद राजनीतिक बवंडर उठ चुका है। विपक्ष सरकार पर लगातार हमलावर है वहीं केंद्र सरकार इस पर इरादा बदलने के मूड में बिल्कुल भी नजर नही आ रही है। कम से गृह मंत्री राजनाथ सिंह और बीजेपी के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद अमित शाह के संसद में दिए बयानों से तो ऐसा ही लगता है।

आपको आगे की खबर बताने से पहले यहां यह बता दें कि एनआरसी के जारी आंकड़ों का असर उन 40 लाख लोगों पर पड़ेगा जिनका नाम इसमें शामिल नही है। इन लोगों को अवैध प्रवासी माना गया है और यह नागरिकता से संबंधित जरूरी शर्तों को पूरा करने में भी विफल रहे हैं। इसको लेकर राजनीतिक बयानबाजी और विरोध चरम पर है लेकिन इन सब के बीच एक सवाल भी है कि क्या यह सब महज मोदी और केंद्र के विरोध के लिए है या वाकई इंसानियत की चिंता राजनीतिज्ञों को है?

खैर अब एनआरसी से आगे बढ़ते हैं और आपको एक और खबर बताते हैं। इस खबर के मुताबिक केंद्र सरकार रोहिंग्या मुसलमानों को देश से बाहर करने की तैयारी में है। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की मानें तो रोहिंग्या मुसलमान कई जगह आपराधिक गतिविधियों में लिप्त पाए गए हैं। उनके आने से भारत की चिंता बढ़ी है। राजनाथ ने यह भी कहा कि राज्य सरकारों को इन पर नजर रखने के आदेश दिए गए हैं।

इसके अलावा एक सवाल के जवाब में राजनाथ ने कहा कि सबसे ज्यादा रोहिंग्या जम्मू और कश्मीर में हैं। यहां के अलावा तेलंगाना, दिल्ली और हिमाचल में भी इनकी संख्या ज्यादा है। म्यांमार से भागे यह लोग भारत मे न आ सकें इज़के लिए सीमा सुरक्षा बल को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। इस समुदाय को सरकार शरणार्थी नही मानती और यह अवैध नागरिक हैं ऐसा भी राजनाथ ने स्वीकार किया। ऐसे में यह साफ है कि रोहिंग्या समुदाय के लिए भारत के दरवाजे बंद हैं और जल्द ही बड़ी कार्रवाई देखने को मिल सकती है।