प्रधानमंत्री की वाकपटता का कोई जवाब नही है। गाहे-बगाहे यह बात आज तक सिद्ध होती रही है। ऐसी ही कहानी आज एक बार फिर पीएम मोदी द्वारा दोहराई गई। इस कहानी में निशाने पर कांग्रेस और उसके युवा अध्यक्ष राहुल गांधी थे। उनके झूठे आरोप थे और कांग्रेस के कारनामे थे।

जैसा कि अनुमान था कि मोदी राहुल और विपक्ष के आरोपों का जवाब तल्ख तेवर में जरूर देंगे,वैसा ही हुआ और जब पीएम मोदी शुरू हुए तो कांग्रेस के साथ उसके सहयोगी दलों के पास बगलें झांकने के अलावा और कोई विकल्प नही था। खैर डेढ़ घंटे के भाषण में पीएम मोदी ने न सिर्फ एक एक आरोप का जवाब दिया बल्कि कांग्रेस के कारनामों का कच्चा चिट्ठा खोल कर रख दिया। इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल कभी मुस्कुराते तो कभी भाव छिपाते नजर आए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में यह बात जगजाहिर है कि जब भी वह बोलते हैं विपक्ष या तो चुप और शांत रहता है या उसके पास कोई जवाब नही होता है। हमेशा की तरह इस बार भी लोकसभा में यही हुआ। दिन का समय कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी का था तो रात की महफ़िल पीएम मोदी लूट ले गए।

इस दौरान आरोप, प्रत्यारोप, इतिहास, वर्तमान और भविष्य को लेकर कई शब्दबाण चले लेकिन सोशल मीडिया से लेकर राजनीति के गलियारों में यह चर्चा जरूर थी कि अगर मोदी बोलेंगे तो महफ़िल उन्ही के नाम होगी। हुआ भी यही। मोदी शुरू हुए तो विपक्ष को न जवाब सुझा न काट बस तेलगू देशम पार्टी के नेताओं ने मोर्चा संभाला लेकिन उसका भी काट मोदी लेकर आये थे। यही वजह रही कि उन्होंने कहा,”जयदेव जी चिंता मत कीजये, सब का सम्मान करूंगा”। पूरा सम्मान दिया और तेलंगाना के साथ आंध्र प्रदेश की चर्चा कर महफ़िल लूट ले गए।

राहुल ने आज दिन में दिए अपने भाषण में कहा था कि पीएम मोदी उनसे आंख नही मिलाते? मोदी ने जवाब दिया हम कैसे आंख मिलाएं आप नामदार हैं और हम कामदार? हश्र के साथ कांग्रेस के कारनामे गिना गए? राहुल के साथ कांग्रेस और विपक्ष को जवाब दे गए? मोदी ने मोरारजी देसाई से लेकर शरद पवार,देवगौड़ा से लेकर चंद्रशेखर और जयप्रकाश सहित कई नेताओं के उदाहरण दे यह साबित करने की कोशिश कि परिवारवाद की वजह से आज भी कांग्रेस वहीं है जहां आज़ादी के बाद थी।

यह सच भी प्रतीत होता है क्योंकि राहुल जहां खुद को मोदी के धुर विरोधी साबित करने में जुटे हैं वहीं कांग्रेस के सहयोगी दल ही उनके विरोधी बने बैठे हैं। ऐसे में कांग्रेस के काले कारनामे और बदनाम करने की इस राजनीति को जिस अंदाज में मोदी ने बयां किया वह काबिल-ए-तारीफ है और हो सकता है कि कहें न कहीं इसका खामियाजा कांग्रेस को भुगतना पड़े। बाकी आने वाला वक़्त ही इसका मिजाज़ तय करेगा।