दो देशों को लेकर दुविधा में मोदी सरकार, कैसे लगे बेड़ा पार?

ईरान से रिश्ते बिगड़े तो तेल का खेल खराब होगा और अगर भारत अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को नही मानता और व्यापार जारी रखता है तो अमेरिका भारत पर भी कुछ प्रतिबंध या सुविधाओं में कटौती का ऐलान कर सकता है।

इतिहास में पहला मौका तो नही कह सकते लेकिन हां यह जरूर कहा जा सकता है कि ऐसे मौके काफी कम देखने को मिलते हैं जब भारत की केंद्र सरकार को दुविधा का सामना करना पड़ा हो। ऐसा ही एक मौका फिर दस्तक दे रहा जो न सिर्फ सरकार के लिए बड़ी दुविधा का सबब बन गया है बल्कि संकट की स्थिति में डालता दिखाई दे रहा है।

इस बार इस दुविधा से निकलने के लिए सरकार के पास न कोई कूटनीति है और न ही कोई ऐसा हथियार जिससे इससे तुरंत निजात मिल सके। खैर अब आइये आपको बताएं कि क्या है यह समस्या जिसने राजनीति और कूटनीति के माहिर खिलाड़ी मोदी और उनकी सरकार के लिए परेशानी खड़ी कर दी है।

यह दुविधा है अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ी दूरियों में किसका साथ देना चाहिए और क्यों? मोदी सरकार आज दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका से अपने रिश्ते खराब नही करना चाहती। वहीं ईरान भारत को काफी कम कीमत पर और सबसे ज्यादा तेल देता है। ऐसे में भारत का ईरान के खिलाफ जाना भी घाटे का सौदा साबित हो सकता है।

ऐसा इसलिए है क्योंकि अगर ईरान से रिश्ते बिगड़े तो तेल का खेल खराब होगा और पहले से राष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे पर घिरी सरकार के लिए समस्या खड़ी होगी। वहीं अगर भारत अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को नही मानता और व्यापार जारी रखता है तो अमेरिका भारत पर भी कुछ प्रतिबंध या सुविधाओं में कटौती का ऐलान कर सकता है। ट्रम्प इस बात को लेकर लगातार धमकी भी देते रहे हैं। ऐसे में देखना है अब इस विकट समस्या और दुविधा में घिरी सरकार किस तरफ जाने का फैसला लेती है और क्या निदान निकलता है।

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