संसद के मानसून सत्र को सरकार के साथ विपक्ष और जनता को भी ढेरों उम्मीदें हैं। सरकार इस सत्र का उपयोग कई महत्वपूर्ण विधेयक पास करा कर करना चाहती थी वहीं जनता में भी उम्मीद जगी थी कि शायद पहले की तरह यह सत्र व्यर्थ न जाये और काम सुचारू रूप से चल सके। हालांकि अब इसमें पेंच फंसता दिख रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि विपक्ष ने मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन को नोटिस सौंपा है।

स्पीकर ने इसे स्वीकार कर लिया है और जल्द ही इसपर चर्चा कराई जा सकती है। विपक्ष यह भली-भांति जानता है कि उसके पास आंकड़ों और संख्याबल की कमी है इसके बावजूद विपक्ष का ऐसा करना हास्यास्पद लगता है। इज़के अलावा इस बात को लेकर जब सोनिया गांधी से पूछा गया तो वह कह गईं की किसने कहा आंकड़े नही हैं? खैर जो भी हो इतना तय है कि इस अविश्वास प्रस्ताव से मोदी सरकार को खतरा नही है।


अब बात करते हैं उन खास विधेयकों की जिन्हें सरकार मानसून सत्र के दौरान सदन के पटल पर रख सकती है। मानसून सत्र के शुरुआत से पहले संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार की मानें तो 24 दिन के इस सत्र में 18 बैठकें होंगी। इस दौरान कुल 43 विधेयक चर्चा और पारित कराने का प्रयास सरकार करेगी।इनमे से छह विधेयक अध्यादेश के स्थान पर लाये जाने हैं।

इन विधेयकों में कई खासे महत्वपूर्ण हैं और इनके पास होने के बाद बड़ा असर देखने को मिल सकता है। कुछ खास अध्यादेशों की बात करें तो भगोड़ा आर्थिक अपराध अध्यादेश 2018, राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय अध्यादेश 2018, इनसोल्वेंसी और बैंकरप्सी संसोधन अध्यादेश 2018 जैसे कई अध्यादेश शामिल हैं।

विधेयकों की बात करें तो सदन में पहले से लंबित कुछ अति महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा और उन्हें पारित कराने का प्रयास होना था। इनमे मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण,उपभोक्ता संरक्षण विधेयक, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों से संबंधित विधेयक, मोटरवाहन संसोधन विधेयक और भ्रष्टाचार संसोधन जैसे कई अन्य विधेयक शामिल थे।

खैर हंगामे और अविश्वास प्रस्ताव लाने की गहमागहमी के बीच शुरू हुए इस सत्र में क्या नतीजा निकलेगा और अपने अंतिम मॉनसून सत्र में सरकार क्या कुछ उपलब्धि हासिल कर पायेगी यह तो आने वाले कुछ दिनों में ही साफ हो पायेगा। बस जनता को सरकार और विपक्ष से सदन के सुचारू रूप से चलने देने की उम्मीद है।