पाकिस्तान की राजनीति इन दिनों गर्म है। आरोप-प्रत्यारोप के साथ चुनाव में जीत को लेकर हर दल अपने-अपने दांव आजमाने में लगा है। कहीं काम करने की उम्मीद बंधा कर वोट लेने की कवायद हो रही है,कहीं भारत और मोदी के नाम पर राजनीति हो रही है तो कहीं परमाणु हथियारों की गीदड़भभकी दिखा सुनहरे सपनों के ख्वाब बुने जा रहे हैं। हाफ़िज़ सईद से लेकर इमरान खान तक मैदान में ताल ठोक रहे हैं।

जैसी करनी वैसी भरनी और बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होए? ऐसी कई कहावतें चरितार्थ हो रही हैं। इन सभी बातों का मतलब हम अपनी खबर में आपको विस्तार से बताएंगे लेकिन इस खबर का मुख्य उद्देश्य शरीफ की शराफत के बारे में जानकारी देना है। आज पाकिस्तान से लेकर पूरी दुनिया की ज़ुबान पर बस यही सवाल है कि क्या शरीफ ने पाक का कर्ज अदा करने के लिए ब्रिटेन लौटने का फैसला किया? क्या वह वाकई इतने शरीफ हैं? या उनका उद्देश्य कुछ और ही है?

ऊपर जैसा कि हमने बताया पाकिस्तान में चुनाव की तैयारियां आरोप-प्रत्यारोप का दौर, रैलियों का दौर,धमकियों का दौर,धमाकों का दौर और तो और नवाज़ शरीफ की शराफत का दौर चल रहा है। आतंक का आका हाफ़िज़ कभी भारत भरोसे चुनाव जीतने के लिए पाक की जनता को परमाणु बम का आसरा दिला रहा है तो कभी इमरान मोदी का भय दिखा सत्ता के शिखर पर पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं। इन सब के बीच सबसे बड़ा दांव नवाज़ शरीफ और उनकी बेटी मरियम ने खेला है। यह खेल न सिर्फ विरोधियों का खेल बिगाड़ सकता है बल्कि नवाज़ की पार्टी के लिए संजीवनी साबित हो सकता है। आइये बताएं कैसे?


शुरुआत करते हैं भारत की राजनीति से ताकि जो कुछ हम पाकिस्तान के संदर्भ में कहना और समझाना चाहते हैं उसे समझने में आसानी हो। भारत की राजनीति में जैसे जाति, धर्म,क्षेत्रीयता,दल और इन सब से ऊपर भावुकता यानी इमोशन्स का गहरा प्रभाव पड़ता है ठीक वैसे ही पाक की राजनीति में भी है। हो भी क्यों न पाक भी तो भारत से अलग हुआ था।

खैर यही दांव नवाज़ ने खेला,नवाज़ यह जानते थे कि उनकी पार्टी इस बार लड़ाई से बाहर है लेकिन पहले सत्ता से बाहर हुए नवाज के खिलाफ जैसे ही फैसला आया उन्होंने एक बड़ा कदम उठाते हुए एलान किया कि वह मुशर्रफ की तरह बुजदिल नही हैं और पाकिस्तान लौटेंगे। उनकी पत्नी ब्रिटेन में जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रही हैं,नवाज भी ब्रिटेन में सुरक्षित रहते लेकिन नवाज पाक लौटे और गिरफ्तार हुए।

इसका सीधा फायदा उनकी पार्टी को चुनावों में मिलेगा यह तय है। और रही बात उनकी सजा और जेल जाने की तो यह किसी से नही छिपा की जब सैयां कोतवाल तो डर काहे का? खैर अब देखना है कि पाक की जनता पर इस शराफत का क्या असर होता है?