पूर्वांचल में स्थित बलिया जिले के लिए बागी बलिया शब्द का प्रयोग करते आपने कई बार सुना होगा। यह शब्द आज एक बार फिर चरितार्थ हो रहा है। इस बार बगावत का झंडा सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ बलिया की बेटी के लिए इंसाफ मांगने को बुलंद किया गया है। बगावत के इस सुर में इस बार सोशल मीडिया भी साथ है और अहम साबित हो रहा है। यह इंसाफ मांगने की बगावत राज्य सरकार पर अब भारी पड़ती दिख रही है। निश्चित तौर पर सरकार की मुश्किलें यह मामला बढ़ाएगा। आइये अब आपको बताएं कि क्या है वह कारण और क्यों बुलंद है विरोध का स्वर?

दरअसल या पूरा विरोध उस एक बच्ची को इंसाफ दिलाने के लिए है जिसकी बड़ी बेरहमी से हत्या कर दी गई। यह बच्ची बलिया के नरही थाना क्षेत्र की रहने वाली थी। वह यूपी की राजधानी लखनऊ में रह कर पॉलीटेक्निक कर रही थी। 21 जून की रात उसे लखनऊ-छपरा इंटरसिटी एक्सप्रेस से परीक्षाओं के समापन के बाद घर लौटना था लेकिन इसी बीच उसके अचानक लापता होने की खबर आई। उसने अपनी माँ से घर वापस लौटने की बात कही थी और यह भी बताया था कि उसकी एक सहेली साथ आएगी। हालांकि वह अपने रूम से निकली लेकिन स्टेशन न पहुंच सकी।

इसके बाद चिंतित सहेलियों ने उस बच्ची के पिता को फ़ोन किया। अनहोनी की आशंका में डूबे वकील पिता ने लखनऊ में अपने एक रिश्तेदार को फ़ोन कर मामले की जानकारी दी। परिजन ने लखनऊ के एक थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी। एक एक पल चिंता से घिरा हुआ बीत रहा था। इसी बीच 22 जून को पुलिस को एक लड़की गंभीर रूप से घायल हालात में मिली। उसके पास ऐसा कुछ नही था जिससे उसकी शिनाख्त हो सके। पुलिस ने लड़की की पहचान के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया और उसे ट्रॉमा सेंटर में दाखिल कराया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

इसी बीच गाजीपुर थाने में तैनात इंस्पेक्टर ने उस लड़की की पहचान की और परिजनों को सूचना दी। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो जब लड़की घायल अवस्था मे मिली टैब उसके कपड़े अस्त-व्यस्त थे और सर पर गंभीर चोट के निशान थे। पुलिस ने रेप के साथ लूटपाट को हत्या की वजह बताया। लड़की के परिजनों में से एक पुलिस के उच्च अधिकारी हैं और लखनऊ में तैनात हैं। पोस्टमार्टम के समय वह मौजूद भी थे। हालांकि इन सब के बीच आज भी पुलिस खाली हाथ है और हवा में तीर चला रही है। कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ करने के अलावा कोई भी अन्य उपलब्धि पुलिस के खाते में नही है।

इस जघन्य हत्याकांड के खिलाफ सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक सत्ता और पुलिस प्रशासन के खिलाफ गुस्सा जताया और दिखाया जा रहा है। आम से लेकर खास तक बच्ची के लिए इंसाफ की मांग कर रहे हैं। कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि लड़की अपने घर से स्टेशन की महज तीन किलोमीटर की दूरी के बीच इस घटना का शिकार हुई और इस दौरान या इस घटना के बाद भी पुलिस अंधेरे में रही।

राजनीति में सख्त कानून व्यवस्था का वादा कर आई योगी सरकार अब इसी मुद्दे पर घिर चुकी है, जवाब देना मुश्किल है। मीडिया से हर जिम्मेदार दूर भाग रहा है और केस लगभग ठंडे बस्ते में जाता नजर आ रहा है। इन सब के बावजूद यह उम्मीद है कि बलिया की बागी भूमि और सोशल मीडिया के इस युग मे यह विरोध कारगर साबित होगा और हत्यारे सलाखों के पीछे होंगे। साथ ही पीड़ित लड़की को न्याय मिलेगा ऐसी उम्मीद है। लेकिन इन सब के बीच सवाल यह है कि क्या हुआ तेरा वादा?