महाराष्ट्र की राजनीति में यूं तो शिवसेना-बीजेपी गठबंधन सरकार में तल्खी तो काफी दिनों से बनी हुई है लेकिन आज जिस तरह शिवसेना की तरफ से 2019 लोकसभा चुनाव एनडीए से अलग होकर लड़ने का ऐलान किया गया और प्रधानमंत्री के साथ बीजेपी पर सवाल उठाए गए, इसके बाद अब महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार के भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं। साथ ही यह भी चर्चा का विषय है कि शिवसेना यह गठबंधन तोड़ने जैसा फैसला अचानक क्यों ले रही है।

अब बात करते हैं पहले महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार के भविष्य की, जिसका भविष्य फिलहाल सुरक्षित दिख तो रहा है लेकिन कब तक यह कहना मुश्किल है। सुरक्षित इसलिए क्योंकि शिवसेना या बीजेपी की तरफ से इसे लेकर कोई भी बयान या गठबंधन तोड़ने संबंधी बात नही कही गई है। कब तक सुरक्षित है यह कहना मुश्किल इसलिए क्योंकि जब तल्खी इतनी ज्यादा है तो बीजेपी और शिवसेना कब तक इस तरह एक दूसरे का साथ निभाएंगे यह कहना मुश्किल है। 


शिवसेना ने अकेले चलने की राजनीति को क्यों चुना यह ठीक ठीक बता पाना तो थोड़ा मुश्किल है लेकिन जब महाराष्ट्र की राजनीति और फिलहाल फडणवीस सरकार में शिवसेना के कद को देखा जाए तो स्थित्ति बहुत हद तक साफ हो जाती है। पहला तो यह कि शिवसेना जिस हिंदुत्व के मुद्दे की राजनीति करती आई वह मुद्दा अब बीजेपी ने छीन लिया है या यूं कहें बीजेपी इस मुद्दे पर ज्यादा सफल है। दूसरा यह कि बीजेपी अपनी तरफ से गठबंधन नही तोड़ेगी, शिवसेना भी यही चाहती है क्योंकि गठबंधन तोड़ मध्यावधि चुनाव में इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। 

सरकार में शिवसेना का कद कम पड़ रहा है और न मन लायक मंत्रालय मिले, न केंद्र में चली न ही शिवसेना का योगदान किसी भी तरह से सुर्खियों में आया। मतलब साफ है कहीं न कहीं इस बात का मलाल शिवसेना को भी है। इसके अलावा क्षेत्रीय राजनीति की जमीन शिवसेना को दरकती दिख रही है। खैर अब इसके पीछे कारण जो भी हो लेकिन यह सौदा दोनों दलों के लिए क्या नफा नुकसान लाएगा यह तो आने वाला वक़्त ही बताएगा।

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