भागलपुर सहित पूरे बिहार में इन दिनों राजनीतिक माहौल गरम है। चंद लोगों की गलती या कहें हुड़दंग का खामियाजा आज पूरा बिहार भुगतने को मजबूर है। भागलपुर में एक जुलूश के बाद हुए हंगामे के बाद अब यह मुंगेर, नालंदा, समस्तीपुर तक पहुंच चुका है। इसमे अब राजनीति भी खूब हो रही है या यूं कहें राजनीति की वजह से ही यह सब हो रहा है।

स्थानीय लोग भी इस बात को भली भांति समझ रहे हैं। हालांकि इन्ही में से कुछ ऐसे लोग भी हैं जो फेसबुक पर तो आपसी सौहार्द और भाईचारे की बात करते हैं लेकिन समाज में वह व्यक्ति,दल और धर्म विशेष के प्रतिनिधि बन जाते हैं।

खैर मुख्य मुद्दे पर आते हैं। अनर्गल प्रलाप का दौर जारी है। भागलपुर में हुए तनाव के इस मामले में कई लोगों के खिलाफ वारंट जारी है। इनमे एक बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी की तरफ से प्रत्याशी और वर्तमान में केंद्रीय राज्य मंत्री अश्वनी चौबे के बेटे अर्जित शाश्वत चौबे भी हैं।

इन्ही का होना इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर गर्म कर रहा है। इसके पीछे वजह भी है। वजह है एक तो वह जुलूश की अगुवाई कर रहे थे और उसके बाद भी लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से एक्टिव हैं और पुलिस की पकड़ से दूर हैं। उनकी गिरफ्तारी को लेकर अब सवाल भी उठने लगे हैं। लेकिन इसके पीछे एक बड़ा कारण है। आइये जाने की क्या?

इस मामले से अलग हट कर कुछ अलग मुद्दों को देखें तो आज जितने भी बड़े नेता हैं वह किसी न किसी आंदोलन, विरोध प्रदर्शन, बाहुबल, पुलिस केस और कोर्ट से होते हुए एक मुकाम पर पहुंचे हैं। ऐसे में भागलपुर की राजनीति में अर्जित को स्थापित करने का इससे अच्छा मौका शायद ही मिले। उदाहरण के तौर पर अगर हिंदुत्व की छवि वाले नेताओं की बात करें तो योगी से लेकर संगीत सोम तक इसी रास्ते पर चले और सफल हुए।

इसके अलावा यह केस धार्मिक भावना से जुड़ा है और अर्जित इसके अगुवा थे, यह समाज बहुसंख्यक है। ऐसे में अगर वह गिरफ्तार हुए तो माहौल और बिगड़ सकता है। इसके अलावा नीतीश कुमार इस दांव को सफल होने देने के पक्ष में कहीं से नही होंगे। यही वजह है कि गिरफ्तारी टाली जा रही है। अब देखना है कि हाइकोर्ट पहुंचे अर्जित का क्या होता है और उसके बाद पुलिस और सरकार का क्या रुख रहता है।