राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद लगातार सिमटती जा रही पार्टी को जीत की पटरी पर वापस लाने के प्रयास में लगे हैं। सफलता अपेक्षित मिली नही है। इसके बावजूद वह दम्भ भरने में कोई कसर नही छोड़ना चाहते। हालांकि राहुल की इस कोशिश में कई रोड़े हैं, जिन्हें दूर करना न सिर्फ उनके लिए जरूरी है बल्कि एक चुनौती भी है। वह भी तब जब उनका सामना आज के समय के सबसे लोकप्रिय और स्वीकार्य नेताओं में से एक नरेंद्र मोदी से है। आइये जाने क्या हैं वह बाधाएं?

राहुल की सबसे पहली बाधा उनकी अपनी छवि है। जिसे सुधारने की कोशिश करते वह नजर आ रहे हैं। राहुल के सामने दूसरी बाधा पार्टी के अंदर और बाहर अपनी स्वीकार्यता बढ़ाना है। यह थोड़ा मुश्किल इसलिए भी है क्योंकि राहुल युवा हैं और कांग्रेस के अनुभवी नेता तवज्जो न मिलने से खुन्नस निकालने में लगे रहेंगे।

बीस से अधिक राज्यों में बीजेपी सरकार के रहते और मजबूत संगठन के रहते राहुल की राह कठिन ही होगी। इसके लिए संगठन चाहिए जो कांग्रेस की हमेशा से कमजोरी रहा है। इन सब से परे राहुल के सामने सबसे बड़ी बाधा पार्टी पर लगे भ्र्ष्टाचार के कलंक को मिटाना न सही लेकिन यह भरोसा दिलाना है कि यह कांग्रेस नई है, इसकी सोच नई है। अब देखना है इन बाधाओं से राहुल कितना पर पाते हैं?