कर्नाटक में चुनावी तारीखों का ऐलान हो चुका है। इससे पहले ही राज्य में राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ गईं थी। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह जहां अपने दल की कमान बीएस येदियुरप्पा के साथ संभाले नजर आ रहे हैं वहीं काँग्रेस कमोबेश अपने अध्यक्ष राहुल गांधी और सीएम सिद्धारमैया के भरोसे नजर आ रही है।

बीजेपी को जहां इस चुनाव से काफी उम्मीदें और दक्षिण के इस राज्य में वह अन्य राज्यों के मुकाबले कहीं ज्यादा मजबूत है वहीं कांग्रेस भी सत्ता में वापसी के सपने संजोने में लगी है। हालांकि अभी तक यह कहना थोड़ा मुश्किल है कि कौन कर्नाटक की सत्ता में वापसी करेगा और किसके लिए यह महज एक सपना बन कर राह जाएगा।

इस दिलचस्प राजनीतिक लड़ाई में एक और भी ऐसा तथ्य है जो इतिहास के पन्ने में दर्ज है। यह इतिहास बना था 2004 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में जब बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में जीत दर्ज करने के बावजूद सत्ता से दूर राह गई थी।

उस दौरान वहां कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर ने गठबंधन की सरकार बनाई थी। हालांकि आज के दौर में यह थोड़ा मुश्किल है क्योंकि अब बीजेपी इसकी माहिर खिलाड़ी बन चुकी है और ऐसे मोर्चे पर गोवा, मेघालय और मणिपुर में कांग्रेस को मात दे चुकी है। आपको बता दें कि 2004 में बीजेपी ने कर्नाटक में 79, कांग्रेस ने 65 और जनता दल सेक्युलर ने 58 सीटें जीती थी।

अगर कर्नाटक में ऐसा हुआ तो बीजेपी एक बार फिर सत्ता से दूर राह सकती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि आज के समय मे हर वह दल बीजेपी को रोकने के लिए साथ आने को तैयार हैं जो कभी एक दूसरे के धुर विरोधी हुआ करते थे और फूटे आंख नही सुहाते थे।

ऐसे में कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर का गठबंधन अगर आने वाले भविष्य में जमीनी हकीकत बना तो शाह को सोचने की जरूरत पड़ सकती है। इसके अलावा मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो खुद बीजेपी के आंतरिक सर्वे में बीजेपी बहुमत से दूर दिख रही है। खैर बाकी नतीजों के लिए थोड़ा इंतजार कीजिये।