राहुल गांधी अब कांग्रेस के अध्यक्ष हैं। कांग्रेस का नारा भी है युवा जोश, युवा सोच लेकिन उनकी कार्यशैली को देखते हुए यह कहना फिलहाल थोड़ा मुश्किल लग रहा है कि क्या वाकई कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन के साथ सोच और जोश में कोई बदलाव आया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि आज भी कांग्रेस वरिष्ठ नेताओं का टैग लगे नेताओं को ढो रही है। नेतृत्व की कमी कहें या युवा नेताओं की अपेक्षा लेकिन यह सच है। ऐसे में आइये जानें क्या है राहुल की बड़ी चुनौतियां और कैसे मोदी से पार पाएंगे राहुल?


राहुल के सामने सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस की छवि के साथ अपनी छवि को सुधारना है। कार्यशैली में बदलाव लाना है क्योंकि कांग्रेस आज भी नेहरू इंदिरा वाली कांग्रेस है इसमें कुछ भी नयापन नजर नही आता। ऐसे में आज का वोटर कांग्रेस से डर होता जा रहा है। इसके अलावा राहुल की खुद की शैली ढुलमुल रही है और वह गाहे-बगाहे ऐसा कुछ कर जाते हैं जो उन्हें मजाक का पात्र बन देती है। ऐसे में इसमे बदलाव लाना जरूरी है। इसके अलावा राहुल को सोनिया के करीबी नेताओं से पार पाते हुए युवा नेताओं से सामंजस्य भी बिठाना होगा। ऐसा तभी होगा जब वह खुद कुछ बड़े फैसले लेंगे। अगर यह चीजें राहुल गांधी करने में सफल हुए तो बेशक वह कॉन्ग्रेस को एक नई ऊंचाई देने और मोदी से पार पाने में सफल होंगे।