बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को वर्तमान राजनीति का चाणक्य बताया जाता है। उन्हें राजनीतिक प्लानिंग में टक्कर देने वाला फिलहाल कोई नही है। उनकी रणनीति सबसे अलग होती है और बहुत निचले स्तर से शुरू होकर ऊपर तक जाती है। यह कहने में या समझने में किसी को भी यह शंका नही होनी चाहिए कि मोदी के चेहरे के अलावा बीजेपी ने अगर जीत हासिल की है तो इसके पीछे अमित शाह का बूथ मैनेजमेंट प्लान ही है। शाह का यह प्लान अब तक हिट रहा है लेकिन आने वाले समय मे उनके सामने भी चुनौती होगी। ऐसा नही है कि राहुल गांधी उनके लिए बतौर कांग्रेस अध्यक्ष चुनैती बनेंगे बल्कि खुद शाह के सामने चुनौती जीत के इस लय को बरकरार रखने की होगी।


अमित शाह के अध्यक्ष रहते ही बीजेपी दुनिया के सबसे ज्यादा सदस्यों वाली या कार्यकर्ताओं वाली पार्टी बनी। लोग आज भी बीजेपी से लगातार जुड़ रहे हैं। दूसरे दलों के नेता भी बीजेपी में आने को लाइन में खड़े हैं। ऐसे में शाह के सामने चुनौती पहले से शामिल कार्यकर्ताओं को नाराज किये बिना इन नेताओं को संभालने की है। टिकट बंटवारे से लेकर संगठन में यह नेता चुनौती पैदा करेंगे। चुनाव में कार्यकर्ता और टिकट के उम्मीदवार भी अच्छी खबर की आशा लगाए रहते हैं ऐसे में अगर दूसरे दलों से आये नेताओं को टिकट दिया गया तो संगठन पर इसका असर पड़ना तय है और नतीजे बीजेपी के खिलाफ जा सकते हैं। ऐसे में आने वाले समय मे खास कर 2019 में शाह इस चुनौती से कैसे निपटेंगे यह देखना दिलचस्प होगा।