केंद्र की बीजेपी सरकार के लिए आजकल सब कुछ ठीक नही चल रहा है। एक तरफ जहां उसके सहयोगी ही उसकी मुश्किलें बढ़ा रहे हैं वहीं दूसरी तरफ राज्यों में भी बीजेपी की मुश्किलें कम होने का नाम नही ले रही हैं। हालांकि यह हालत सिर्फ बीजेपी की नही है यही हाल कांग्रेस का भी है और वह भी अलग-थलग ही नजर आ रही है। बात कुल मिलाकर कुछ ऐसी है कि कांग्रेस को कोई भी क्षेत्रीय दल तवज्जो देता नही दिख रहा और बीजेपी किसी अन्य दल को अपने सामने तवज्जो दे उनका ग्राफ बढ़ाना नही चाहती है। यही वजह है कि हर जायज-नाजायज मांग मानने के बदले बीजेपी ने डिफेंड करना ही सही समझा है।


बीजेपी सरकार के खिलाफ तो कुछ दिनों पहले तक सहयोगी रही टीडीपी ने अविश्वास प्रस्ताव लाने का एलान कर दिया। इसके अलावा शिवसेना और पीडीपी जैसे दल भी समय-समय पर बीजेपी की मुश्किलें बढ़ाते रहे हैं। अब कांग्रेस की बात करें तो राहुल के अध्यक्ष बनने के बाद भी उसके हिस्से कुछ खास उपलब्धि नही रही है। हालत ऐसी बनी है कि यूपी में सपा-बसपा गठबंधन के बाद कांग्रेस से एक बैठक तक नही की गई। इसके अलावा कभी कांग्रेस की सहयोगी रही ममता बनर्जी अब केसीआर के साथ मिलकर तीसरे मोर्चे के एलान कर चुके हैं। उनके अलावा भी इसमे कई दल शामिल हैं। ऐसे में यह कहना गलत नही होगा कि आने वाले समय मे क्षेत्रीय दल और सहयोगी ही कांग्रेस बीजेपी दोनो के लिए मुसीबत बनेंगे और 2019 की राह में रोड़े डालेंगे।