राहुल गांधी का राजनीतिक सफर, ऐसा नही इसमे सिर्फ नाकामियां हैं

आज भले ही वह एक चुनौती से भरी हुई राह पर कांग्रेस को लेकर चल रहे हैं लेकिन ऐसा नही है कि नाकामी ही उनकी पहचान है जिस मेहनत से राहुल राजनीति में डंटे हैं उससे साफ है कांग्रेस और राहुल के खाते में भी आने वाले समय मे कई बड़ी उपलब्धियां दर्ज होंगी।

राहुल गांधी एक ऐसे परिवार से आते हैं जो इस देश की राजनीति और सत्ता की धुरी रही है। वह एक ऐसे दल का नेतृत्व करते हैं जिसने 70 साल तक इस देश की सत्ता संभाली है। राजनीति में बेशक अभी राहुल कई नेताओं से अनुभव के मामले में पीछे हैं, खास कर नरेंद्र मोदी से जिनसे अक्सर उनकी तुलना होती है। लेकिन ऐसा भी नही है कि राजनीति में राहुल के नाम सिर्फ असफलता और नाकामियां ही हैं। राहुल को राजनीति में आये डेढ़ दशक से ज्यादा का समय हो गया है। इन 15 सालों में उनमे बहुत कुछ नया दिखा है। आइये जाने क्या हैं उनकी उपलब्धियां।


2003 में पहली बार राहुल गांधी अपनी माँ सोनिया गांधी के साथ बैठकों और सार्वजनिक जीवन मे दिखने लगे। इसके बाद कयासों का दौर शुरू हुआ। तब राहुल ने 2004 में कहा कि मैं राजनीति के खिलाफ नही हूँ और कब आना है या नही आना है यह जल्द बताऊंगा। इसके बाद 2004 के मार्च में ही उन्होंने सक्रिय राजनीति में आने का एलान कर दिया। 2007 में उन्हें पार्टी में महासचिव बना बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई। इसी साल उनकी अगुवाई में बनाई गई अभियान समिति ने यूपी विधानसभा चुनाव में 22 सीटें हासिल की, यह पहली उपलब्धि रही। 


इसके बाद 2009 में राहुल ने अपनी सीट 3 लाख से ज्यादा वोटों के मार्जिन से जीती। साथ ही यूपी में 80 में से 21 सीटें कांग्रेस को मिली जिसका श्रेय राहुल को जाता है। इससे पहले राहुल ने अपना पहला चुनाव एक लाख के बड़े अंतर से जीता था। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि आज भले ही वह एक चुनौती से भरी हुई राह पर कांग्रेस को लेकर चल रहे हैं लेकिन ऐसा नही है कि नाकामी ही उनकी पहचान है  जिस मेहनत से राहुल राजनीति में डंटे हैं उससे साफ है कांग्रेस और राहुल के खाते में भी आने वाले समय मे कई बड़ी उपलब्धियां दर्ज होंगी।

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