कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कांग्रेस के अधिवेशन के दौरान जबरदस्त हुंकार भरी। अपना विज़न और मिशन भी बताया, मुद्दे भी गिनाए, प्राथमिकताएं तय की और भी बहुत कुछ किया। इन सब से परे राहुल सहित लगभग सभी कांग्रेसी नेताओं ने एक सुर में बीजेपी,आरएसएस,मोदी और शाह को अपने निशाने पर लिया। राहुल ने एक और महत्वपूर्ण बात कही कि अगर मोदी सरकार को हटाने और बीजेपी को हराने के लिए गठबंधन भी करना पड़े तो भी वह पीछे नही हटेंगे। हालांकि उनका इशारा किससे गठबंधन का था और कहां था यह उन्होंने नही बताया। और तो और गठबंधन का अंजाम शायद राहुल को गुजरात और यूपी में याद होगा।


यह बयान महत्वपूर्ण तो है लेकिन उतना नही है जितना कि यह सवाल की आखिर राहुल गठबंधन करेंगे किससे और कब? राहुल का यह बयान ऐसे समय मे आया है जब कई अलग अलग क्षेत्रीय दल तीसरे मोर्चे की गठन प्रक्रिया में लगे हैं। खास बात यह है कि कांग्रेस और बीजेपी से अलग इस गठबंधन की दिशा में पहल दक्षिण भारत से हुई है। इस पहल को झामुमो, तृणमूल और एआईएमआईएम जैसे दल समर्थन का एलान भी कर चुके हैं। ऐसे में यह तय है कि कांग्रेस अलग थलग पड़ेगी और इस गठबंधन का खामियाजा भी कांग्रेस को ही भुगतना होगा। अब सवाल ऐसे में यह भी अहम है कि डिनर पॉलिटिक्स भरोसे विपक्ष की जो तैयारी सोनिया ने की थी उसमें सेंध लगती दिखाई पड़ रही है और अगर ही रहा तो राहुल शायद ही अकेले मोदी को टक्कर दे पाएंगे?