क्या मोदी इस एक दांव से जीतेंगे युवाओं का दिल?

रोजगार के नाम पर वादे का एक कोना भी सरकार पूरा नही कर सकी है। ऐसे में एक साल शेष रहते क्या यह माना जाना चाहिए कि रोजगार और किसान के मुद्दों पर ही आगे का राजनीतिक भविष्य तय होगा?

लोकसभा चुनाव में अभी एक साल से ज्यादा का वक़्त है लेकिन इसको लेकर सरगर्मियां अभी से तेज हो गई हैं। अभी से आकलन और अनुमान लगाए जाने लगे हैं कि इन चुनावों के बाद देश का राजनीतिक भविष्य क्या होगा। कांग्रेस भी अपनी वापसी का दम्भ भर रही है वहीं बीजेपी भी तैयारियों में लगी है।

हालांकि इन सब के बीच कुछ ऐसे मुद्दे हैं जो राहुल और मोदी दोनो के खेल को बना या बिगाड़ सकने के माद्दा रखते हैं। कांग्रेस के लिए आज सबसे बड़ा मुद्दा रोजगार के मुद्दे का है। वह लगातार इसको लेकर पीएम मोदी पर हमलावर है। युवा भी नाराज हैं और सड़कों पर हैं। रोजगार के नाम पर वादे का एक कोना भी सरकार पूरा नही कर सकी है। ऐसे में एक साल शेष रहते क्या यह माना जाना चाहिए कि रोजगार और किसान के मुद्दों पर ही आगे का राजनीतिक भविष्य तय होगा?


जवाब है अगर आज का यह माहौल यूँ ही जारी रहा तो जरूर होगा लेकिन इतनी आसानी से कोई भी राजनीतिक दल एक मुद्दे को तूल नही पकड़ने देगा। यही वजह है कि रोजगार के मुद्दे पर घिरी सरकार मुद्रा योजना और कौशल विकास योजना के जरिये मील स्वरोजगार के आंकड़े बता रही है।

साथ ही एक साथ रेलवे में 90 हज़ार सीटों पर बहाली प्रक्रिया शुरू हो गई है और करीब एक लाख चालीस हजार सीटों पर जल्द होने की उम्मीद है। केंद्रीय रिक्तियों के भरने के लिए भी तैयारी हो रही है। ऐसे में यह तय माना जा रहा है कि इस साल रोजगार बहुतायत संख्या में आएंगे और यही 2019 के लिए मोदी की सबसे बड़ी चाल होगी। इसके अलावा आंकड़ों की बाजीगरी और वादों की झड़ी भी बेड़ा पार करने में मददगार होगी।

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