उत्तरप्रदेश की राजनीति में एक दूसरे के धुर विरोधी रहे सपा और बसपा आज समय की मांग को समझते हुए एक हो चुके हैं। कांग्रेस पहले से ही सपा के साथ गठबंधन में है लेकिन अचानक बदले राजनीतिक समीकरण और उसके बाद आये उपचुनाव के नतीजे न सिर्फ राज्य की योगी सरकार बल्कि केंद्र की मोदी सरकार और कांग्रेस के लिए भी विचलित करने वाले हैं। यह नतीजे यूँ तो महज दो सीटों के हैं लेकिन आने वाले समय मे इसके गंभीर राजनीतिक परिणाम देखने को मिलेंगे।


ऐसा इसलिए है क्योंकि यह दोनों सीटें न सिर्फ बीजेपी के दो कद्दावर नेताओं के वर्चस्व की थीं बल्कि इस सीट को योगी सरकार का लिटमस टेस्ट माना जा रहा था इसके अलावा वहां सपा-बसपा के एक होने से मिली हार ने बीजेपी को तगड़ा झटका माना जा रहा है। कांग्रेस गठबंधन में होते हुए भी पूरे परिदृश्य से गायब रही और जमानत तक जब्त करा बैठी। वहीं अब एक अन्य सीट कैराना में उपचुनाव होने हैं जो पश्चिमी यूपी में है और बीजेपी सांसद हुकुम सिंह के निधन से खाली हुई है। ऐसे में यह इलाका भी मायावती का गढ़ रहा है। ऐसे में अगर गठबंधन चल निकला तो न सिर्फ कांग्रेस विपक्ष की धुरी बनने से चुकेगी बल्कि बीजेपी के लिए भी 2019 की डगर कठिन हो जाएगी।