2015 विधानसभा चुनाव के दौरान जब राजद,जदयू और कांग्रेस का महागठबंधन हुआ तो राज्य में मृतप्राय पड़ी कांग्रेस को जैसे संजीवनी मिल गई। कांग्रेस उठ खड़ी हुई और न सिर्फ 20 से ज्यादा सीटें जीती बल्कि सत्ता में भागीदार भी बनी। हालांकि बदले राजनीतिक समीकरण में अब कांग्रेस जहां शून्य की स्थित्ति में है वहीं आपसी कलह से भी जूझ रही है। अब देखना है कि राजद के साथ चल रही कांग्रेस का भविष्य आने वाले समय मे क्या होता है?


कांग्रेस न सिर्फ बिहार में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है बल्कि वहां राजद के पीछे पीछे चलती दिख रही है। पार्टी नेतृत्व के अभाव और आपसी कलह से भी दो चार हो रही है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष इस्तीफा दे जदयू में शामिल हो चुके हैं वहीं सदानंद सिंह जैसे वरिष्ठ नेता भी कुछ दिनों से नीतीश के करीब दिख रहे हैं। इसके अलावा विधायक अजीत शर्मा भी नेतृत्व पर सवाल खड़े कर चुके हैं। प्रदेश अध्यक्ष का विरले ही कोई बयान या कोई ख़बर सामने आती है। ऐसे में पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी को आने वाले समय मे इन चुनौतियों से भी निपटने को तैयार रहना चाहिए कि कांग्रेस का बिहार में भविष्य क्या होगा?