कर्नाटक में विधानसभा चुनाव जैसे जैसे नजदीक आते जा रहे हैं वैसे वैसे एक दूसरे को मात देने की हर मुक्कमल तैयारी होती दिखने लगी है। आरोप-प्रत्यारोप से शुरु हुआ यह दौर अब लोक लुभावन वादों से शुरू होकर धर्म पर आ रुका है। राज्य की कांग्रेस सरकार ने आज एक ऐसे फैसले को मंजूरी दी है जो लंबे समय से मांगी जा रही थी। इस फैसले को कांग्रेस का सबसे बड़ा मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है। आइये जानते हैं क्यों?

दरअसल कर्नाटक में एक समुदाय है। यह समुदाय लिंगायत समुदाय के नाम से जाना जाता है। यह कर्नाटक में एक बड़ा वोट बैंक वाला समुदाय है साथ ही इसे बीजेपी समर्थक भी माना जाता है। बीजेपी के राज्य इकाई के बड़े नेता और मुख्यमंत्री के दावेदार बी एस येदुरप्पा भी इसी समुदाय से आते हैं। इस समुदाय की मांग थी कि इन्हें हिन्दू धर्म से अलग एक धर्म के रूप में मान्यता दी जाए। हालांकि आरएसएस इसे धर्म के नाम पर बंटवारा बता विरोध करता रहा है। ऐसे में राज्य की कांग्रेस सरकार ने उनकी मांगों पर सुनवाई के लिए कुछ दिनों पहले एक कमिटी बनाई थी। अब जबकि उस कमिटी की रिपोर्ट आई तब इसे कैबिनेट से मंजूरी दे दी गई। 

अब इसे केंद्र सरकार को स्वीकृति के लिए भेजा जाना है। इस फैसले के बाद यह तय माना जा रहा है कि लिंगायत समुदाय कांग्रेस की तरफ अपना झुकाव दिखाएगा। साथ ही अब बीजेपी दुविधा में है कि इसे स्वीकार किया जाना चाहिए या अस्वीकार। क्योंकि अस्वीकार करना मतलब नाराजगी मोल लेना जो चुनावों में भारी पड़ेगा। ऐसे में या तो यह फैसला चुनावों तक लटकाया जाएगा या इसे मंजूरी दे कर कांग्रेस के मास्टरस्ट्रोक का जबाव उसी के नदाज़ में दिया जाएगा।