सहयोगी दल ही कहीं डूबा न दें बीजेपी की नाव

जब समय और किस्मत बुलंद होती है उस समय दुश्मन भी दोस्त बन जाते हैं लेकिन असली इंसान की पहचान तभी होती है जब वह सुख, दुख, हार, जीत और स्वार्थ को किनारे रख संग देता रहे। हालांकि यह बातें राजनीति के मामले में लागू नही होती है। यही वजह है कि जब जैसी जरूरत तब तैसी दोस्ती का रिवाज राजनीति में चलता आया है। इस अवसर का लाभ उठाने में सबसे ज्यादा माहिर लोक जनशक्ति पार्टी के सुप्रीमो राम विलास पासवान को माना जाता है। यही वजह है कि केंद्र में सरकार किसी की हो राम विलास मंत्री जरूर बने। हालांकि अब जबकि बीजेपी के कई सहयोगी बीजेपी के खिलाफ हैं ऐसे में रामविलास भला कैसे चूकते।


आंध्रप्रदेश में टीडीपी, महाराष्ट्र में शिवसेना ने बीजेपी के खिलाफ पहले ही मोर्चा खोल रखा है। विपक्ष अलग लामबंद हो मोदी को हराने की जुगत में भिड़ा है। इसी बीच एक बयान रामविलास पासवान की तरफ से भी आया है जिसमे उन्होंने बीजेपी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए हमला बोला है। खटास क्यों है? है भी या बस आने वाले चुनाव का आकलन कर पासवान पलटी मारने की तैयारी में हैं यह तो वक़्त के आगोश में है लेकिन जिस तरह एक के बाद एक बीजेपी के सहयोगी विरोधी बनते जा दही हैं ऐसे में यह कहना कहीं से गलत नही कि समय रहते बीजेपी को संभलने की जरूरत पड़ेगी। हो न हो 2019 में सबसे ज्यादा नुकसान बीजेपी को ऐसे ही सहयोगियों से उठाना पड़ सकता है।

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