मोदी- शाह के निशाने पर अब कांग्रेस और राहुल नही यह हैं

तीसरे मोर्चे की कवायद में कांग्रेस पूरी तरह तटस्थ है, उसका जनाधार भी खिसकता नजर आया है ऐसे में बीजेपी भी यह मान कर चल रही है कि कांग्रेस से ज्यादा खतरा के क्षेत्रीय गठबंधन और तीसरे मोर्चे से है।

2019 लोकसभा चुनाव होने में अभी एक साल से ज्यादा का वक़्त बाकी है। हालांकि इसको लेकर राजनीतिक माहौल अभी से गर्म होने लगा है। विपक्ष तो विपक्ष बीजेपी के सहयोगी दल भी बीजेपी पर हल्ला बोलने लगे हैं। ऐसे में अनुमान लगाए जाने भी स्वाभाविक है कि बीजेपी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस का क्या होगा? वापसी किसकी होगी? कौन बाज़ीगर बनेगा? हालांकि राह दोनो ही दलों की मुश्किल है। आइये जानें कैसे।

एक तरफ जहां राहुल आक्रामक नदाज़ दिखा मोदी की भाषण शैली अपना उनपर हमलावर हो रहे हैं दूसरी तरफ बीजेपी और कांग्रेस से अलग एक अन्य राजनीतिक घटनाक्रम में तीसरा मोर्चा बनाने की कवायद शुरू हो गई है। इसके अलावा उपचुनाव के अनुभव बीजेपी और कांग्रेस दोनो के लिए खट्टे रहे हैं ऐसे में अब रणनीति बनाने में किस बात पर जोर होगा यह अहम है।

तीसरे मोर्चे की कवायद में कांग्रेस पूरी तरह तटस्थ है, उसका जनाधार भी खिसकता नजर आया है ऐसे में बीजेपी भी यह मान कर चल रही है कि कांग्रेस से ज्यादा खतरा के क्षेत्रीय गठबंधन और तीसरे मोर्चे से है। ऐसे में यह तय माना जा रहा है कि बीजेपी की अगली रणनीति कांग्रेस के खिलाफ कम और क्षेत्रीय दलों के साथ तीसरे मोर्चे पर ज्यादा होगा।

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