आप सोच रहे होंगे कि एक केमिस्ट मौत कैसे बेच सकता है लेकिन समाज की यह एक कड़वी सच्चाई है। जिस केमिस्ट के जिम्मे दवाई दे मरीज की जान बचाने की जिम्मेदारी होती है वही केमिस्ट अगर पैसे के लोभ में या थोड़े से मुनाफे के लिए अगर बिना पर्चे किसी भी इंसान को नींद की गोलियां या कफ सिरप बेचे तो इसे मौत बेचना ही कहेंगे। यह सवाल या जानकारी हम कोई पहली बार नही दे रहे लेकिन आप सोच कर देखिए कि जो दवाइयां बिना डॉ के पर्चे के बेचना गैरकानूनी है उससे अगर कोई आत्महत्या करे तो सब सही नही है। कहीं न कहीं गड़बड़ी जरूर है और यह गड़बड़ी दवा की दुकान से होती है।

आपको एक बार यकीन नही होगा लेकिन आप इसकी पुष्टि खुद कर सकते हैं। आप किसी केमिस्ट की दुकान पर जाइये और उसे किसी भी सिरप या नींद की दवा का नाम बताइए हो सकता है वह पहले इनकार करे या ना नुकुर करे लेकिन जैसे ही आप उन्हें थोड़ा रिक्वेस्ट करेंगे या ज्यादा पैसे का आफर देंगे तो वह एक पल सोचे बिना आपको वह दवाइयां दे देगा। इस दवाई का इस्तेमाल सबसे ज्यादा युवा करते हैं। क्योंकि यह आसानी से मिल जाता है। हालांकि हम यह नही कह रहे कि हर दवाई विक्रेता या केमिस्ट ऐसा काम करता है लेकिन यकीन मानिए आत्महत्या या खुद को नुकसान पहुंचाने के लिए प्रयोग होने वाली यह दवाएं आसानी से दवा दुकानों पर मिल रही है। इसमें ऐसा नही है कि अधिकारियों को जानकारी नही होती, बिल्कुल होती है लेकिन यह भारत है और यहां हर चीज का जुगाड़ है।