बच्चे आज छोटी-छोटी बातों पर आत्महत्या का रास्ता अख्तियार कर ले रहे हैं। हम रोज ऐसी खबरों से दो चार होते हैं जिनमे यह पढ़ने देखने और सुनने को मिलता है कि माँ,पिता,शिक्षक या सहपाठी के डांटने से दुखी बच्चे ने सुसाइड कर लिया। हालात इतने बुरे हैं कि टीवी देखने से मना करने, मनपसंद खाना न बनाने, मोबाइल न देने बहुत ही छोटी-छोटी बातों पर बच्चे अपनी जान दे रहे हैं। इसकी वजह हमारे समाज मे होने वाले बदलाव, परिवेश और माता पिता का बच्चों के लिए उचित समय न दे पाना है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सबसे ज्यादा किस उम्र के बच्चे आत्महत्या के बारे में सोचते हैं?

ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ क्विन्सलैंड में हुए एक शोध के मुताबिक 12 साल से कम उम्र के बच्चों में आत्मघाती कदम उठाने का विचार अन्य बच्चों की तुलना में पांच गुना ज्यादा होता है। इस शोध में 19 देशों के 33000 लोगों और बच्चों को शामिल किया गया था। इस शोध में यह भी बताया गया है कि हर इंसान के अंदर कम से कम एक बार आत्महत्या का खयाल जरूर आता है। हालांकि इससे ज्यादा गंभीर सवाल यह है कि हमारे समाज के बच्चे इतने आत्मघाती क्यों होते जा रहे हैं और इन्हें कैसे रोका जा सकता है?