आज हमारे समाज मे, हमारे देश मे आत्महत्या की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। हम पूरी दुनिया से इस मामले में सबसे आगे हैं। ऐसे में इसको लेकर चिंता का माहौल सरकार, समाज और परिवार हर ओर देखा जा रहा है। हालांकि इन सब से हट के कुछ ऐसे भी सवाल हैं जो लोगों के मन मे उठते हैं। खास कर धार्मिक मान्यताओं के आधार पर अक्सर यह सवाल सभी के मन मे उठता है कि ऐसे लोगों का ऐसी असमय काल के गाल में समाए लोगों का क्या होता है? उनकी आत्मा का क्या होता? तो आइए आज आपको बताएं कि इन सवालों का जवाब।

वैदिक ग्रंथों में एक लाइन में इनका जवाब मिलता है। आत्मघाती मनुष्यों के बारे में कहा गया है कि-असूर्या नाम ते लोका अँधेन तमसावृता।तास्ते प्रेत्यभिगच्छन्ति ये के चात्महनो जनाः।इसका मतलब है कि आत्महत्या करने वाला व्यक्ति मृत्यु के बाद अज्ञान, अंधकार से परिपूर्ण, बिना सूर्य के प्रकाश के असूर्या नामक लोक मे जाते हैं। इसका मतलब है कि कहीं से भी यह सही कदम नही होता और हमें समस्याओं से भागने, मौत को अपनाने की जगह इनसे जूझना और जीतना सीखना चाहिए।