हमारे देश का सामाजिक ताना-बाना कुछ ऐसा है जिसमें सरकारी नौकरी मिलने का मतलब गंगा नहा लेना और उसमें भी अगर नौकरी देश में सबसे प्रतिष्टित माने जाने वाली आईएएस या आईपीएस की हो तो चार धाम या स्वर्ग वाली फीलिंग आती है। यह एक ऐसी नौकरी है जिससे पूरा गांव जुड़ता है, पूरा समाज जुड़ता है। अब आप सोच रहे होंगे कैसे तो हम बताते हैं, अगर किसी एक गांव के एक घर मे कोई लड़का या लड़की यह जॉब पा जाए तो यह मान लिया जाता है कि उस जाति के और उस समाज और गांव के हर व्यक्ति ने वह नौकरी पा ली। इससे सब की साख जुड़ी होती है। यही वजह भी है कि हर विद्यार्थी के मन मे हर माँ-बाप के मन मे एक बार यह सवाल जरूर आता है कि उसे आईएएस बनना है या बनाना है। 

हालांकि इसके पीछे एक स्याह सच्चाई है, वह सच्चाई है कि इस ख्वाब को पूरा करने में जमीन जायदाद बिक जाती है, विद्यार्थी की उम्र बीत जाती है लेकिन सफलता गिने चुने लोगों को मिलती है। कई बार हालात ऐसे बनते हैं कि परिवार और असफलता के साथ अकेलेपन की जद में आये विद्यार्थी इसे झेल नही पाते और आत्महत्या जैसे गंभीर कदम उठा लेते हैं। ऐसा नही है कि सफलता नही मिलती लेकिन यह पूरी तरह मेहनत पर निर्भर है, हम यह भी नही कह रहे विद्यार्थी मेहनत नही करते लेकिन अनावश्यक दबाव की वजह से न तो उन्हें सफलता मिलती है, न वह ध्यान लगा पाते हैं। इसके बाद सिर्फ एक विकल्प होता है आत्महत्या। ऐसे में हमें सोचने कि जरूरत है। ऑप्शन बहुत है बस जीने की और कुछ कर गुजरने की ललक चाहिए। माता पिता भी ध्यान दें और अनावश्यक दबाव न दें।