गुजरात के शहर अहमदाबाद से करीब 400 किलोमीटर दूर सौराष्ट्र के इलाके में विकास की नही तंगहाली की कहानियां गूंजती हैं। किसानों की आत्महत्या की खबर यहां आम बात है। यूँ तो यह इलाका तीन जिलों का एक समूह है जिनमे जामनगर, जूनागढ़ और राजकोट जैसे जिले शामिल हैं लेकिन उद्योग धंधों से परे अगर खेती-किसानी की बात करें तो तस्वीर कहीं से कुछ ठीक नही है। आज आंकड़ों के इतिहास में बीबीसी की एक रिपोर्ट पढ़ी, यूँ तो यह रिपोर्ट कुछ वर्ष पुरानी है और उत्सुकता के बावजूद कुछ भी नया नही मिला ऐसे में संशय और बढ़ गया। 

गुजरात मे भी किसान आत्महत्या के आंकड़ों में कई छेद नजर आते हैं, सरकारी आंकड़ों में जहां हेराफेरी की जाती है वहीं सरकार मौत का आंकड़ा महज एक बताती है जबकि विपक्ष मृत किसानों की संख्या को पांच हजार से ऊपर मानता है। आरटीआई से कई बार इस संबंध में जानकारी मांगी गई और हर बार अलग-अलग आंकड़े आये इससे यह साफ है कि आंकड़ों में खेल सरकारी स्तर से ही खेला और छुपाया जा रहा है। स्थानीय लोग भी यह मानते हैं कि किसानों की स्थिति बद से बदतर है और लगातार आत्महत्या की घटनाएं बढ़ रही है। ऐसे में राजनीति के लिहाज से सबसे बड़े इस इलाके में यह परिस्थिति क्यों है और अगर गुजरात के विकास का दम्भ भरा जाता है तो वह सौराष्ट्र तक क्यों नही पहुंचा यह सोचने योग्य है।