तेलंगाना भी भारत के उन राज्यों में से एक है जहां किसान सबसे ज्यादा परेशान और बदहाल हैं। उनकी आत्महत्या के आंकड़े भी कई अन्य राज्यों की तुलना में ज्यादे हैं। यही वजह है कि जब किसानों ने खुद ही अपनी लड़ाई लड़ने का संकल्प लिया और आत्महत्या जैसे कदम को छोड़ विरोध पर उतरे तो राज्य से लेकर केंद्र सरकार तक के हाथ पैर फूल गए।


यह घटना यूँ तो पुरानी है लेकिन सरकारों के लिए इसमे सबक है। सबक यह है कि या तो झूठे वादे न करें या वादे करें तो पूरा करें। यह प्रदर्शन उन अधिकारियों के लिए भी एक सीख थी जो जिम्मेदार पद पर बैठकर भी किसानों के दुख दर्द से अनजान बने रहते हैं। घटना 28 अप्रैल की है जब किसानों ने विरोध में न सिर्फ अपनी फसल फूंक दी बल्कि कई सरकारी कार्यालयों को भी आग के हवाले कर दिया। यूँ तो यह विरोध सिर्फ मिर्च की सही कीमत न मिलने को लेकर था लेकिन यह आंदोलन सभी किसानों के लिए एक प्रेरणा बन गया।

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