भारत जिसे युवाओं का देश कहा जाता है वहां युवाओं की आत्महत्या एक गंभीर समस्या है। इस पर सोचने और समझने की आवश्यकता है। आंकड़ों के मुताबिक भारत मे आत्महत्या करने वाले आयुवर्ग के लोगों में सबसे ज्यादा 15-29 आयु वर्ग के लोग हैं। इसके अलग अलग कारण हो सकते हैं लेकिन इसमें परिवार और समाज के साथ सरकारी सिस्टम भी दोषी है। हम बताते हैं कैसे, लेकिन उससे पढ़ें यह छोटी सी कहानी।

बिहार राज्य के एक छोटे से शहर में चार दोस्त एक साथ प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करते थे। बात साल 2011 की है। उसके बाद धीरे-धीरे समय बिता और असफलता और सफलता के दौर आते जाते रहे। चार में से दो अनारक्षित श्रेणी के थे और दो अति पिछड़ा वर्ग से। यहां यह बात बताना क्यों आवश्यक है यह आप थोड़ी देर में समझ जाएंगे। 2015 में इन चार में से अतिपिछड़ा वर्ग के एक दोस्त की नौकरी लग गई, एक ने अपने परिवार का व्यापार संभाल लिया, एक अनारक्षित दोस्त आगे पढ़ने और प्राइवेट जॉब करने दिल्ली चला गया।

बचा हुआ एक दोस्त मेहनत करता रहा और अकेला पड़ गया जिसके बाद उसकी मानसिक स्थिति उसकी असफ़लता के साथ बिगड़ने लगी और उसने आत्महत्या जैसा गंभीर कदम उठा लिया। जब कि हर परीक्षा में उसके नंबर तीनों से बेहतर रहे। सौभाग्य वश वह बच गया और आज भी संघर्ष कर रहा है।

अब शायद यह बताने की आवश्यकता नही कि सरकारी सिस्टम कैसे दोषी है। सोचिए, समझिए और देखिए कि कैसे एक विशेष वर्ग के उत्थान के लिए एक वर्ग को पीछे धकेल दिया जा रहा है।