दो देशों में राजनीतिक उथल-पुथल के पीछे भारतीय, पढ़ें कौन और कैसे

अगर यह आरोप सही साबित हुए और जांच में सही पाए गए तो शीर्ष नेतृत्वकर्ताओं के साथ इन भारतीय उद्योगपतियों के लिए भी मुश्किल बढ़ेगी। फिलहाल जांच पूरी होने का इंतजार है।

भारत के अंदर आज तक हम राजनीतिक पहुंच का फायदा उठाते हुए लोगों के बारे में पढ़ते रहे हैं। राजनेता और व्यापारी के इस गठजोड़ से कई बार हुए घोटाले और गडबडी की खबरें आती हैं। लेकिन अगर ऐसी ही खबर दुनिया के दो देशों से आई है, जहां सत्ता और उद्योग जगत की जुगलबंदी ने वहां के शीर्ष नेतृत्व पर संकट खड़ा कर दिया है। खास बात यह है कि इन दो अलग-अलग देशों में सत्ता पर लगे ग्रहण के पीछे भारतीय उद्योगपतियों और नेताओं का गठजोड़ सामने आ रहा है।


इसमें पहला मामला है दक्षिण अफ्रीका का, जहां के राष्ट्रपति जैकब जुमा पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे और अंततः उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। इस मामले में कथित रूप से तीन भारतीयों की भूमिका सामने आई है। इन्हें गुप्ता भाइयों के नाम से जाना जाता है। एक समय मे भारत से व्यापार करने की सोच ले दक्षिण अफ्रीका पहुंचने वाले गुप्ता बंधुओं ने फर्श से अर्श का सफर तय किया और जैकब जुमा के कार्यकाल में कथित तौर पर उनके साथ मिलकर गड़बड़ी कर लाभ कमाने और सत्ता का दुरुपयोग किया। इन्ही मामलों के सामने आने के बाद जांच हुई और अब जुमा को कुर्सी गंवानी पड़ी।


दूसरा मामला इजरायल के है। यहाँ प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर भ्रष्टाचार के गम्भीर आरोपों के मामले में जांच करते हुए पुलिस ने कार्रवाई से सम्बंधित प्रस्ताव भेजा है और इसके पीछे पर्याप्त सबूत होने की बात भी कही है। यूँ तो यह कोई नई बात नही है और नेतन्याहू सहित उनकी पत्नी और बेटे पर ऐसे आरोप पहले भी लगे हैं लेकिन इस बार बढ़ते विरोध और दबाव के चलते बेंजामिन की सत्ता पर खतरा मंडराता दिख रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इन आरोपों में मशहूर भारतीय उद्योगपति रतन टाटा का नाम भी कथित रूप से सामने आया है। फिलहाल नेतन्याहू ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है लेकिन अगर दबाव ज्यादा बढ़ा और दक्षिण अफ्रीका जैसे हालात बने तो बेंजामिन के लिए सत्ता बचाना शायद मुश्किल सबब बन जाए।


कुल मिलाकर देखें तो विश्व के दो अलग-अलग देशों में उपजे इस संकट में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर भारतीय नाम सामने आए हैं। साथ ही अगर यह आरोप सही साबित हुए और जांच में सही पाए गए तो शीर्ष नेतृत्वकर्ताओं के साथ इन भारतीय उद्योगपतियों के लिए भी मुश्किल बढ़ेगी। फिलहाल जांच पूरी होने का इंतजार है।

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