भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक सपना देखा जिसे नाम दिया गया डिजिटल इंडिया और मकसद था भारत को डिजिटल प्रयोग करते हुए विकसित करने का लेकिन खुद सरकार के फैसले इस पर सवालिया निशान लगाते नजर आ रहे हैं. इसके अलावा जिस पाकिस्तान को आतंक के आका के रूप में जाना जाता है, जो कश्मीर की अशांति के लिए, सैनिकों की शहादत के लिए जिम्मेदार है, भारत से लड़ने के लिए परमाणु बम विकसित कर रहा है क्या भारत ऐसी चीजों से यज्ञ और हवन से निपटेगा? डिजिटल इंडिया के इस युग में ऐसी बातें तार्किक भले ही न हों लेकिन सच है.

दरअसल आज देश के गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने इंडिया गेट के ऐतिहासिक स्थल से एक रथ को हरी झंडी दिखाई. यह रथ देश भर के पवित्र तीर्थ स्थल और अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सटे स्थलों से मिट्टी और जल का संग्रहण कर वापस मार्च में दिल्ली लौटेगी. इसके बाद इस मिट्टी और जल का उपयोग कर 108 हवन कुंद तैयार किये जायेंगे और इसी कुंद में 1111 पंडित या ब्राह्मण एक साथ लाखों बगुलामुखी मंत्र का उच्चारण करेंगे. इस कार्यक्रम में पीएम नरेन्द्र मोदी, राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद जैसे दिग्गजों को शामिल होने के लिए निमंत्रण भेजा गया है और जाहिर है बीजेपी की तरफ से आयोजित इस यज्ञ में इनका शामिल होना लगभग तय है.

इस यज्ञ को 2019 चुनाव से जोड़ कर देखा जा रहा है. साथ ही शास्त्रों के मुताबिक बगुलामुखी की आराधना सत्ता और दुश्मन के विनाश से जुडी हुई है. यह आंतरिक, पारिवारिक सुख-समृधि से जुडी हुई है. ऐसे में यह माना जा रहा है कि बीजेपी की तरफ से आहूत यह यज्ञ एक तीर से कई निशाने को साधने वाला है. जिसमें हिन्दू वोटर्स को रिझाना, पाक के नापाक इरादों का धार्मिक विधि से विनाश, सत्ता में वापसी का अन्धविश्वासी तरीका इत्यादि शामिल है. इसके अलावा इसे आडवानी के समय शुरू हुए बीजेपी के रथ यात्रा की राजनीति से जोड़ कर देखा जा रहा है.

रथ की राजनीति के अलावा नए तरह की इस यज्ञ राजनीति पर सवाल उठने लगे हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि हाल के दिनों में कश्मीर में आतंकी घटनाएँ बढ़ी हैं. सैकड़ों की संख्या में जवान शहीद हो चुके हैं. जवाब देने और कारवाई के बदले बयान के रूप में मुहतोड़ जवाब दिया जा रहा है, कड़ी निंदा की जा रही है. दूसरी तरफ जब डिजिटल इंडिया की बात करने वाली सरकार ऐसे यज्ञ के आयोजन की अगुवा बनेगी तो सवाल उठने लाजमी भी हैं. क्या सरकार ऐसे जवाब देगी? कैसे कड़ी कारवाई होगी? क्या सरकार के पास अब कोई मुद्दा और कारवाई का दमखम नहीं है? सवाल अनेक हैं लेकिन उम्मीद इस यज्ञ से भी काफी है, ऐसे में देखना है आने वाले समय में इसके कैसे नतीजे आते हैं और जनता के बीच क्या सन्देश जाता है.