सरदार वल्लभ भाई पटेल गृह मंत्री और बड़े नेता रहे, उन्होंने अलग-अलग रियासतों में बँटे देश को एक किया, उप-प्रधानमंत्री भी बने लेकिन कभी पीएम न बन सके, अब सवाल यह है कि इतने बड़े नेता, इतना बड़ा काम और सम्मान सब था फिर ऐसा क्यों हुआ? आइए हम आपको आज कुछ कारण बताते हैं जिससे यह स्पष्ट होता है कि पटेल पीएम क्यों नहीं बने और अगर वह पीएम होते तो कैसे बदलता इतिहास भूगोल-

1 . इसके पीछे पहला कारण यह माना जाता है कि गाँधी जी के करीबी और सहयोगी रहने के बावजूद सरदार पटेल उनके अहिंसा के सिद्धांत को स्वीकार नहीं कर पाए थे. वह खिलाफ तो नहीं गए लेकिन कभी समर्थन भी नहीं दिया. इसके अलावा जितना सरदार देश के आर्थिक और सामाजिक हालात को समझते थे शायद उस परिदृश्य में उन्हें यह सही नहीं लगता था. यही वजह रही कि गाँधी जी अहिंसक नीति न होने का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा. 


2 . सरदार पटेल राष्ट्रपति पद के लिए डॉ राजेंद्र प्रसाद को समर्थन दे चुके थे. नेहरू और गाँधी जी इसके खिलाफ थे, वह चाहते थे कि सी राजगोपालाचारी को राष्ट्रपति बनाया जाए. इसके लिए नेहरू ने राजेंद्र बाबू से लिखित में यह लिया था कि वह राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार नहीं बनेंगे, हालांकि पटेल पर गए और इसका नुकसान पटेल को हुआ. गाँधी जी और नेहरू दोनों ही उनके खिलाफ हो गए. 

3 . आज़ादी के बाद सरदार पटेल चाहते थे कि कश्मीर को बिना किसी शर्त के भारत का हिस्सा बना शामिल किया जाए लेकिन नेहरू इसके खिलाफ थे और उन्होंने कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा दे दिया. जिसके बाद नेहरू-पटेल के रिश्ते में खटास आ गई. और कश्मीर एक अंतरराष्ट्रीय समस्या बन गया जो आज तक बदस्तूर जारी है. यही वजह है कि हाल में पीएम मोदी ने कहा कि अगर पटेल पीएम होते तो कश्मीर समस्या न होती.

4 . सरदार पटेल ने महात्मा गाँधी की हत्या के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबन्ध लगा दिया था. उन्होंने अगस्त 1948 में संघ प्रमुख माधवराव सदाशिव गोलवलकर को पत्र लिखा और कहा कि आप जहर उगलने वाली बातें क्यों करते हैं. क्यों ऐसा माहौल बनाया जिसमे हिन्दू-मुस्लिम की बात हुई और महात्मा गाँधी की हत्या हो गई? हालांकि बाद में यह प्रतिबन्ध हट गया और आज आरएसएस है, वरना पटेल के फैसले से यह संगठन एक इतिहास होता.

यह भी पढ़ें- सरदार पटेल जैसा सरदार हर कोई नही हो सकता,पढ़ें