डोनाल्ड ट्रम्प जब से अमेरिका के राष्ट्रपति बनें हैं तब से वह अपने काम की वजह से कम और अपने बयानों की वजह से ज्यादा चर्चा में रहे हैं. उनके कार्यकाल में जहाँ अमेरिका के अंदर ही उनका मीडिया से लेकर आमलोगों ने खुलेआम विरोध किया है वहीँ हिंसक घटनाओं के साथ उत्तरकोरिया से तनाव भी बढ़ा हुआ है. खैर अब अमेरिका से बाहर निकलते हुए बात करते हैं राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रम्प के 10 दिवसीय लम्बे पहले एशिया दौरे की. 


जी हाँ ट्रम्प का यह अब तक का सबसे लम्बा विदेश दौरा है इस दौरान वह वियतनाम,जापान चीन सहित कई देशों की यात्रा करेंगे जिनमे से कई जगह वह निपट चुके हैं लेकिन इन छोटे और अमेरिका के लिहाज से कम महत्वपूर्ण देशों का दौरा थोड़ा समझ से परे है इसके अलावा भारत को छोड़ा ट्रम्प पहले चीन पहुंचे यह  भी आश्चर्यजनक रहा क्योंकि एक तरफ ट्रम्प जहाँ भारत को सबसे बड़ा साझीदार बताते हैं और प्रधानमंत्री को करीबी दोस्त बताते हैं वहीँ चीन-भारत विवाद के बीच भारत को छोड़ चीन का साथ देने भी पहुँच जाते हैं खैर इसके पीछे उनकी अपनी मज़बूरी भी है उत्तरकोरिया?


हालांकि ट्रम्प कब अपनी बात से पलटी मारें और कब किसका समर्थन कर दें यह तो ट्रम्प ही जानें ऐसा ही एक माजरा तब देखने को मिला जब ट्रम्प चीन में कई समझौते और सहयोग के साथ उत्तरकोरिया से निपटने की बात कर वियतनाम में एशिया प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) शिखर सम्मेलन में शामिल होने पहुंचे। इस सम्मलेन से अलग आयोजित मुख्य कार्यकारियों की बैठक को संबोधित करते हुए ट्रम्प ने जहाँ भारत के प्रधानमंत्री और भारत की आर्थिक प्रगति की जमकर प्रशंसा की वहीँ चीन को जम कर खरी खोटी सुनते हुए लताड़ भी लगाई.

ट्रम्प ने चीन पर यह आरोप भी लगाया कि चीन के वजह से अमेरिकी लोगों को नौकरी नहीं मिल रही है.चीन को घुड़की देते हुए ट्रंप ने कहा कि व्यापार में पक्षपात के प्रति अमेरिका अपनी आंखें बंद नहीं रखेगा.भारत के बारे में बोलते हुए ट्रम्प ने कहा कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र होने के साथ विकास की तेज रफ्तार हासिल करने में सफल रहा है. उन्होंने मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि मोदी भारत के प्रधानमंत्री ने अपने नागरिकों को एकजुट करने में सफलता हासिल की है. 


ट्रम्प के इस बयान के बाद जहाँ भारत का डंका दुनिया में एक बार फिर बजा है वहीँ दुनिया के पटल पर मोदी की छवि और मजबूत हुई है. इसके अलावा भारत के अंदर जो लोग भारत के जीडीपी और अमेरिका चीन के साथ भारत के संबंधों को लेकर सरकार और मोदी पर सवालिया निशान लगते हैं उन्हें भी शायद उनके सवाल का जवाब सबसे ताकतवर मुल्क के राष्ट्रपति के इस बयान के बाद मिलता नजर आ रहा है साथ ही चीन भी समझ ले कि उसकी अकड़ अब भारत के सामने नहीं चलेगी. खैर तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों में यह तो स्पष्ट है कि भारत अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत स्थिति में है वहीँ चीन और पाकिस्तान जैसे मुल्कों की अहमियत को झटका भी है.