हिमाचल में मौसम बदलने से पहले सत्ता बदलने के लिए आज मतदान संपन्न हो गए. इसी के साथ सभी राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों ने अपने जीत और सरकार बनाने के दावे भी कर दिए हैं. इन चुनावों के परिणाम आने में हालांकि अभी लंबा वक़्त है लेकिन आकलन और अनुमान के अलावा बम्पर वोटिंग ने स्पष्ट कर दिया है कि इस बार के नतीजे चौंकाने वाले होंगे साथ ही हार और जीत का अंतर भी काफी बड़ा होगा.

चलिए आपको मतदान और नतीजे के बीच इस कशमकश वाले दौर से थोडा हट के मतदान से पहले कि कुछ जरुरी बातें बता दें जिससे शायद आपको अंदाजा लगे कि कौन बनेगा हिमाचल का सरदार? कांग्रेस का राज रहेगा बरक़रार या बीजेपी बनाएगी सरकार? आपको बता दें कि चुनाव से पहले जैसा कि परंपरा है विद्रोह और दल बदल कि वैसा ही कुछ हिमाचल में भी हुआ.

कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री वीरभद्र जहाँ मोर्चा सँभालते दिखे वहीँ अंतिम दिनों में बीजेपी ने अपने पुराने,वरिष्ठ और कद्दावर नेता प्रेम कुमार धूमल पर भरोसा जताते हुए उन्हें मुख्यमंत्री का चेहरा बनाया.भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद जहाँ वीरभद्र कांग्रेस के वीर साबित हुए और कांग्रेस के लिए यह चुनाव उन्ही के इर्द गिरध नजर आया वहीँ बीजेपी की तरफ से अमित शाह,नरेन्द्र मोदी और बाद में प्रेम कुमार धूमल ने मोर्चा संभाला हालांकि यह बात समझ से परे रही कि बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय को क्यों और क्या देखते हुए बीजेपी ने चुनाव प्रभारी बनाया था खैर अब यह साड़ी बातें पुराणी हैं.

अब आपको चुनाव के कुछ आंकडें बता दें.हिमाचल में 68 विधानसभा सीटें हैं. जिसमे सरकार बनाने के लिए 35 सीटों कि जरुरत पड़ेगी.राज्य में कुल 37 लाख से अधिक मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया. चुनाव आयोग के मुताबिक प्रदेश में कुल 75 फीसदी मतदान हुआ. इस दौरान करीब 37,000 कर्मचारियों-अधिकारियों की तैनाती की गई थी. इनके अलावा 17,770 पुलिसकर्मियों और होमगार्ड के जवानों को भी तैनात किया था. मैदान में उतरे 337 उम्मीदवारों में 60 निवर्तमान विधायक शामिल हैं.इसके अलावा मैदान में 19 महिलाओं सहित 112 निर्दलीय उम्मीदवार भी हैं.

अब बात करते हैं मतदाताओं के मूड कि तो यह आज साफ़ हो गया कि बम्पर मतदान से जीत हार का अंतर बड़ा होगा साथ ही कांग्रेस कि सत्ता में वापसी भी कठिन होगी. हालांकि बीजेपी के लिए यह राह आसान नहीं है लेकिन आमतौर पर राजनीतिक समझ और सक्रियता से दूर इस राज्य में वीरभद्र पर भ्रष्टाचार के आरोप और बीजेपी द्वारा बनाया गया यह सबसे बड़ा मुद्दा कांग्रेस को सत्ता से दूर करने को काफी है. इसके अलावा विकास में पिछड़ापन भी वजह है. कुल मिलाकर अगर सीटों की बात करें तो निर्दलीय और स्थानीय दलों का चुनाव में कोई खास महत्व नहीं होगा और लड़ाई प्रत्यक्ष रूप से बीजेपी कांग्रेस के बीच थी.

सत्ता में कौन होगा? बीजेपी को 40 से 50 सीटें जबकि कांग्रेस को 18 से 28 सीटें मिल सकती हैं. हालांकि कुछ सीटों का आकलन थोडा मुश्किलों भरा है और इनमे से एक से दो सीटें निर्दलीय के खाते में जा सकती है.यानि यह स्पष्ट है सत्ता में बीजेपी की वापसी हो रही है जो बीजेपी और मोदी के विज़न 2019 के लिए अच्छी खबर मानी जा सकती है.