भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह केरल दौरे पर हैं. देश भर के चुनावों में बीजेपी की जीत के नायक रहे शाह का ध्यान अब दक्षिण भारत की राजनीति पर है. यहाँ भी वह बीजेपी को मजबूत करने में लगे हैं. इसी क्रम में वह केरल दौरे पर पहुंचे जहाँ आज दिन भर वह कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे. अमित शाह यूँ तो हर राज्य के दौरे पर हैं और इसे 2019 के लोकसभा चुनावों की तैयारी से जोड़ कर देखा जा रहा है.


अमित शाह के दौरे पर बैठक,रोड शो,रैली,कार्यकर्ता सम्मेलन, पद यात्रा जैसे कई कार्यक्रम हुए लेकिन आज  केरल के कन्नूर जिले के पयन्नूर में होने वाली पदयात्रा खास है, क्योंकि इस पदयात्रा में राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल होंगे.हालांकि पहले से सिर्फ अमित शाह का कार्यक्रम प्रस्तावित था और योगी को केरल अचानक बुलाया गया है. इसके पीछे की वजह भी बड़ी है.


इसका कारण है योगी की हिन्दू नेता की छवि को केरल में भुनाना. यही वजह है कि अचानक योगी के सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए गए और उन्हें केरल आने को कहा गया. आपको बता दें कि मुख्यमंत्री के मंगलवार रात और बुधवार के सारे कार्यक्रम रद कर दिए गए. मुख्यमंत्री को कैबिनेट बैठक के बाद भारतीय विदेश सेवा के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ मुलाकात करनी थी, प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा, नगर विकास विभाग एवं राज्य निर्वाचन आयुक्त के साथ बैठक करनी थी लेकिन इन सब के बावजूद इतनी हड़बड़ी में बुलाना खुद में कई सन्देश देने को काफी है.


योगी आदित्यनाथ की पहचान एक फायरब्रांड हिन्दू नेता की है.गोरखपुर मंदिर के महंत और पूर्व सांसद योगी अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं. छः महीने का वक़्त पूरा भी हो चूका है लेकिन इस दौरान वह अपने काम की वजह से कम और बयानों की वजह से ज्यादा चर्चा में रहे. हालांकि इससे राजनीति में फर्क नहीं पड़ता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि बीजेपी अब योगी के भरोसे दक्षिण भारत की राजनीति में पैर ज़माने की तैयारी कर रही है.योगी के भरोसे आगे बढ़ने के पीछे पर्याप्त कारण भी हैं जिनमे सबसे पहला योगी की हिंदूवादी छवि, युवाओं में लोकप्रियता,और कहीं न कहीं केरल की सत्ता में लम्बे समय से राज कर रहे वामपंथी दलों से हिन्दुओं का मोहभंग होना भी है. 


मुख्यमंत्री बनने से पहले भी योगी का अंदाज़ और तेवर यही था. हालांकि कुछ दिनों तक योगी खामोश रहे लेकिन अब फिर वह अपने पुराने रंग में दिख रहे हैं और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पार्टी दोनों उन्हें इसी तरह देखना भी चाहते हैं. यही वजह है कि योगी सीएम बनते ही अयोध्या सहित कई धार्मिक स्थलों का दौरा कर चुके हैं और इनका विकास उनकी प्राथमिकताओं में है. अब योगी का जादू केरल कि राजनीति में क्या गुल खिलायेगा यह तो आने वाला वक़्त बताएगा लेकिन यह तो तय है कि बीजेपी योगी को फायरब्रांड नेता के रूप में ही देखना चाहती है.