उत्तरप्रदेश सरकार ताजमहल को पर्यटन स्थल और भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं मानती है. ऐसा हम नहीं कह रहे हैं खुद यूपी सरकार द्वारा प्रकाशित कराई गई पर्यटन सूची और किताब कह रही है. इससे पहले खुद मुख्यमंत्री योगी भी बिहार में एक रैली के दौरान यह कह चुके हैं कि ताजमहल भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं है. ऐसे में यह किताब जिस पर खुद मुख्यमंत्री योगी और पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी की तस्वीर है उनके इस बयान का समर्थन करती नजर आ रही है.


आपको बता दें कि यूपी सरकार ने कुछ दिनों पहले अपने छः महीने के कार्यकाल का ब्यौरा जारी किया है. जिसमे पर्यटन मंत्रालय की तरफ से एक किताब जारी की गई थी. इसी किताब पर अब बवाल मचा है. बवाल की वजह है दुनिया के सात अजूबों और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र ताजमहल का इसमें न होना. हालांकि जब विवाद बढ़ा तो खुद पर्यटन मंत्री मीडिया के सामने आईं और कहा कि छः महीने में जो हमने किया उन्हें ही जगह दी गई है. इसे विवाद न बनाएं. हमारा ध्यान ताज और बृज के क्षेत्र में है. कई बड़ी योजनाओं पर काम भी चल रहा है.


हालांकि मंत्री जी की यह सफाई इसलिए भी आधारहीन नजर आती है क्योंकि इसी किताब में गोरखनाथ मंदिर को दो पेज कि जगह दी गई है जिसके महन्त खुद योगी हैं. इसके अलावा बुद्ध सर्किट,रामायण सर्किट, बनारस में होने वाली गंगा आरती को भी जगह मिली है तो ताजमहल में ऐसा क्या नहीं कर सकी सरकार जो इसे इस सूची से ही बाहर कर दिया या यूँ कहें कि इन छः महीने में यूपी के सबसे बड़े पर्यटन स्थल को नजरंदाज कर सिर्फ इन जगहों पर ही सरकार ने ध्यान क्यों केन्द्रित किया?


राज्य सरकार द्वारा जारी की गई इस किताब पर विपक्ष हमलावर है और सरकार पर साम्प्रदयिक होने का आरोप लगा रहा है. इस मुद्दे पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी ने ट्वीट करते हुए योगी पर तंज कसा और कहा कि सूरज को दीपक न दिखाने से उसकी चमक नहीं घटती! ऐसे ही राज के लिए भारतेंदु ने लिखा था, ‘अंधेर नगरी, चौपट राजा.


सरकार की मंशा साम्प्रदायिक हो या विपक्ष के हाथ आया यह महज एक मुद्दा हो,वजह को पीछे छोड़ते हुए अगर मुद्दे की बात की जाए तो ताज महल प्रेम की निशानी होने के साथ भारत में पर्यटकों का पसंदीदा स्थल और भारत की समृद्ध,ऐतिहासिक और पौराणिक विरासत का प्रतीक है. इसलिए इस मुद्दे पर राजनीति न करते हुए ऐसे ही रहने देने की अपेक्षा आम जनता को है.