साउथ फ़िल्म इंडस्ट्री के सबसे बड़े विलन में से एक प्रकाश राज इस बार बीजेपी समर्थकों के लिए खलनायक के किरदार में नजर आ रहे हैं। उन्होंने एक बयान दिया है जो बीजेपी के साथ प्रधानमंत्री मोदी और उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी और उनके समर्थकों को कतई रास आने योग्य नही है।

प्रकाश राज ने यह बयान कर्नाटक में पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या और इस मामले में प्रधानमंत्री की चुप्पी को लेकर दिया है। एक कार्यक्रम में शामिल होने बेंगलुरु पहुंचे प्रकाश ने कहा कि गौरी लंकेश की हत्या मामले में प्रधानमंत्री की चुप्पी दुखद है। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर एक भीड़ ऐसी भी है जो उनकी मौत का जश्न मना रही है और तो और गौरी की मौत के बाद अपशब्द का प्रयोग करने वाले व्यक्ति को खुद प्रधानमंत्री मोदी फॉलो कर रहे हैं?

प्रकाश राज के इस बयान के साथ यह भी खबर आई थी कि वह अपना अवार्ड इस हत्याकांड और प्रधानमंत्री की चुप्पी के बाबत लौटा सकते हैं। हालांकि मीडिया की सुर्खियों में आते ही उन्होंने सफाई दी की उन्होंने अवार्ड लौटाने के बारे में उन्होंने कुछ नही कहा है।

आपको बता दें कि प्रकाश गौरी लंकेश के करीबियों में से हैं और गौरी लंकेश से पहले वह उनके पिता के करीबी दोस्तों में माने जाते थे। उन्होंने यह भी कहा कि मैं पिछले 30 सालों से गौरी को जानता था और मैंने कभी नही सोचा था कि ऐसा दिन भी आएगा जब गौरी की इस तरह हत्या कर दी जाएगी।

प्रकाश ने योगी पर हमला बोलते हुए कहा कि मैं अब तक यह नही समझ पा रहा कि यूपी में चल क्या रहा है? योगी महंत हैं या सीएम? मैं बहुत कंफ्यूज हूँ? आगे बोलते हुए उन्होंने कहा कि मैं एक सफल और बड़ा एक्टर हूँ लेकिन योगी-मोदी मुझसे भी बड़े एक्टर बनना चाहते हैं। हालाँकि मैं यह समझ सकता हूँ।

प्रकाश के बयान से यह तो स्पष्ट है कि दक्षिण भारत मे अपने पैर पसारने की कवायद में जुटी बीजेपी को बड़ा झटका लग सकता है। यह बयान ऐसे समय मे आया है जब कमल हसन बीजेपी के खिलाफ हैं,बीजेपी का अपना कोई वजूद नही है,गौरी लंकेश की हत्या के बाद माहौल बीजेपी के खिलाफ है और सबसे बडी बात की अब तक इस मामले में मोदी सरकार की तरफ से कोई बयान नही आया है न ही हत्यारों को पकड़ा जा सका है। कुल मिलाकर बीजेपी के लिए प्रकाश राज का यह बयान नई मुसीबत का सबब बन सकता है।

प्रकाश के इस बयान को लोग इसे सोशल मीडिया पर सस्ती लोकप्रियता पाने का एक स्टंट बता रहे हैं जो सिर्फ ट्विटर पर ट्रेंड होने के लिए है। सच्चाई जो भी हो लेकिन गौरी की हत्या के बाद यह तो तय है कि विचारधारा और कलम को खामोश करने के लिए गोली चलाकर जान लेने का यह सहारा कतई सही नही है और न ही बिना सबूत और गवाह के किसी पार्टी,नेता या सम्प्रदाय विशेष को जिम्मेदार ठहराना सही है। ऐसा इसलिए है क्योंकि पहले भी अवार्ड वापसी और असहिष्णुता के नाम पर सस्ती लोकप्रियता पाने का यह खेल हम देख चुके हैं।

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