बिहार में बहार है,भ्रष्टाचार अपरम्पार है

खबर के मुताबिक बिहार के भागलपुर में एक बाँध उद्घाटन से पहले ही टूट गया है और आश्चर्य कि बात यह है कि दिनांक 20 सितम्बर को खुद बिहार में बहार के मुखिया नितीश कुमार जी इसका उद्घाटन करने वाले थे.

बिहार में बीजेपी जदयू सरकार बनने के बाद विवादों का साथ छुटता नजर नहीं आ रहा है आज बिहार के भागलपुर स्थित कहलगांव से एक बड़ी खबर आ रही है खबर के मुताबिक बिहार के भागलपुर में एक बाँध उद्घाटन से पहले ही टूट गया है और आश्चर्य कि बात यह है कि दिनांक 20 सितम्बर को खुद बिहार में बहार के मुखिया नितीश कुमार जी इसका उद्घाटन करने वाले थे.

आप तस्वीरों में देख सकते हैं कि कैसे पानी का तेज बहाव कहलगांव एनटीपीसी में बह रहा है. इस नहर के टूटने से एनटीपीसी के आवासीय इलाके में बाढ़ का मंजर है और लोगों को भारी कठिनाई का सामना भी करना पड़ रहा है इस बाँध के टूटने के बाद प्रशासनिक अमले में हडकंप मच गया और कई आलाधिकारी मौके पर पहुँच चुके है.

आपको बता दें कि बाँध टूटने के बाद जल संसाधन मंत्री ललन सिंह ने कहा कि उद्घाटन कार्यक्रम रद्द कर दिया गया है और इससे परियोजना में नये निर्माण को कोई क्षति नहीं पहुंची है. इसके अलावा मंत्री जी बहाने बनाने से भी नहीं चूके. उन्होंने भ्रष्टाचार की बात न करते हुए यह कह दिया कि बाँध से अचानक ज्यादा मात्रा में पानी छोड़ने और अतिरिक्त दबाव कि वजह से डैम टूटा.

आपको बता दें कि बिहार के कहलगांव में सिंचाई योजना के तहत बटेश्वरस्थान गंगा पंप नहर परियोजना सरकारी स्तर पर बन कर तैयार होने कि बात कही गई थी इसका उद्घाटन कल मुख्यमंत्री के हाथों होना था लेकिन इससे पहले ही भ्रष्टाचार कि बुनियाद पर बना यह डैम टूट गया और खास बात यह है कि इस मुद्दे पर जीरो टॉलरेंस कि बात करने वाली नितीश सरकार की कलई खुल गई इस योजना पर कुल 389.31 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं.

यहाँ यह बताना भी जरुरी है कि इस परियोजना से बिहार के अलावा झारखंड को भी फायदा मिलता सूत्रों के अनुसार भागलपुर में 18620 हेक्टेयर और झारखंड के गोड्डा जिले में 22658 हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी. शुरू में तो यह परियोजना सिर्फ 13.88 करोड़ की थी शुरुआत में इस योजना को जनवरी 1977 में योजना आयोग ने 13.88 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृति दी थी.

 कुल मिलकर देखें तो दो राज्यों के किसानों को खेती के लिए संजीवनी देने वाली परियोजना उद्घाटन से पहले ही फेल हो गई है और साथ किसानों के साथ कहलगांव के नागरिकों को असुविधा का भी सामना करना पड़ रहा है अब सवाल यह है कि क्या इसकी जांच होगी,या यह भी बस बहार के आगोश में खो जाने वाला एक काण्ड साबित होगा .

Leave a Reply

Your email address will not be published.