राजनीति

नमो-नमो का जाप,विपक्ष पूरा साफ़।

पांच राज्यों के चुनावी नतीजों के बाद आज हारने और जीतने वाले सभी दलों के पास बस तीन शब्द थे अद्भुत, अतुल्नीय, अविश्वशनीय।

उत्तरप्रदेश विधानसभा में सातवें चरण यानी आज से ठीक पांच दिन पहले बाबा नाम केवलं का जाप हो रहा था सभी बाबा विश्वनाथ के दरबार में थे लेकिन 11 मार्च को चुनावों के आये परिणामों ने सिर्फ मोदी नाम केवलं की गूंज पर मुहर लगा दी है।आज न सिर्फ उत्तरप्रदेश बल्कि देवभूमि उत्तराखंड में भी नमो नमो का जाप सुनाई दे रहा है।इसके अलावा गोवा और मणिपुर में भी अच्छी स्थिति और पंजाब में हार ने भी नमो मंत्र की गूंज का जोरदार समर्थन किया है।

उत्तरप्रदेश विधानसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भरोसे उतरी बीजेपी आज तक के सबसे प्रचंड बहुमत के साथ 14 वर्ष के वनवास को ख़त्म कर सत्ता में लौट चुकी है।सपा-काँग्रेस, बसपा का सूपड़ा साफ हो गया है।नतीजे ऐसे जिनके बारे में हारने और जीतने वालों ने  कभी कल्पना भी नहीं की थी।अनुमान से परे,दावों से उलट,वादों के विपरीत,भीड़ से इतर,मुद्दों आरोपों प्रत्यारोपों को पीछे छोड़ते हुए जो बस एक बात आज दिन भर में सामने आई वह थी देश के सबसे बड़े सूबे के चुनावी परिणाम में देश के सबसे बड़े नेता नरेंद्र मोदी के साथ विश्व की सबसे बड़ी पार्टी की प्रचंड जीत की गूंज।विरोधियों के पास न शब्द हैं न निराशा और हताशा जताने का कोई पैमाना बस है तो एक इवीएम में छेड़छाड़ का एक अदना सा बहाना।नोटबंदी के बाद यह दूसरा मौका है जब बुआ और भतीजा एक सुर में बोल रहे हैं।बहरहाल इस जीत के मायने बहुत हैं।2019 का सेमीफाइनल माने जा रहे इन चुनावों में 403 में से 324 लेकर बीजेपी ने 2014 से भी बड़ी जीत को दोहराया है।विरोधियों के पास अभी मोदी मंत्र और मैजिक से निपटने का कोई कारगर उपाय नहीं है।यहाँ तक की आज उम्र अब्दुल्ला और कई बड़े नेताओं ने 2019 की हार आज कबूल कर ली है।

मोदी नाम केवलम।

उत्तरप्रदेश चुनावों में आज बीजेपी की सुनामी में कई दिग्गज डूब गए तो कई ऐसे भी थे जो पार्टी और आंधी सुनामी से परे अपना पद प्रतिष्ठा बचाने में सफल रहे।इनमे मउ से मुख़्तार अंसारी और कुंडा सीट से बाहुबली रघुराज प्रताप उर्फ़ राजा भैया शामिल हैं।राजा भैया ने यह चुनाव एक लाख तीन हज़ार वोटों से जीता है।1993 के बाद से कुंडा से वह लगातार विधायक हैं।इनके अलावा अपनी पत्नी की हत्या के जुर्म में जेल में बंद अमनमणि त्रिपाठी भी निर्दलीय चुनाव जीतने में सफल रहे।कई दिग्गज इस सुनामी में भी अपनी प्रतिष्ठा बचाने में असफल रहे इनमे यूपी बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी शामिल हैं।वह चुनाव हार गए।

यूपी में हारे जीते बड़े नाम।

उत्तराखंड चुनाव के नतीजों की बात करें तो यहाँ कांग्रेस को बहुत बड़ी हार का सामना करना पड़ा।उसके मुख्यमंत्री हरीश रावत दोनों ही सीटों से चुनाव हार गए।इसके अलावा यहाँ भी बीजेपी ने कांग्रेस को धूल चटाते हुए 56 सीटें जीत लीं।उत्तराखंड में यह चुनाव हरीश रावत को नाकाम बताते हुए विकास् के मुद्दे को एजेंडा बना कर लड़ा गया था।इसके साथ ही यूपी के बाद बीजेपी ने यहाँ भी प्रचंड बहुमत हासिल कर लिया।

उत्तराखंड में हारे जीते दिग्गज

पंजाब चुनावों में सत्ता विरोधी लहर के साथ आम आदमी पार्टी की एंट्री ने यहाँ चुनावों को दिलचस्प बना दिया था।यहाँ एक तरफ जहाँ कांग्रेसद की तरफ से कैप्टेन अमरिंदर सिंह थे वहीँ दूसरी तरफ अरविन्द केजरीवाल खुद मोर्चे पर लगे थे इसके अलावा बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल की तरफ से प्रकाश सिंह बादल और सुखबीर सिंह बादल मोर्चे पर डटे हुए थे ।इस चुनाव में सत्ता पाने का ख्वाब देख रही आप को तगड़ा झटका लगा है।आप यहाँ केवल 20 सीटें जीत सकी जबकि कांग्रेस सत्ता में पूर्ण बहुमत से वापस आई है।बीजेपी गठबंधन को यहाँ केवल 18 सीटें मिलीं है।

पंजाब में कांग्रेस की बल्ले बल्ले।

गोवा में बीजेपी और मनोहर पर्रिकर की साख दाँव पर थी।यहाँ से मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पार्सेकर खुद चुनाव हार गए।वही कांग्रेस और बीजेपी के बीच यहाँ मुकाबला लगभग बराबरी पर रहा और अब 10 सीट जीत चुकीं अन्य पार्टियों के समर्थन से यहाँ की सत्ता का रास्ता तय होगा।आनेवाले एक दो दिनों में सत्ता की खींचतान देखने को मिलेगी।

गोवा में सीटों का समीकरण।

उग्रवाद और आर्थिक नाकेबंदी की मार झेल रहे उत्तर पूर्व राज्य मणिपुर की बात करें तो यहाँ के मतदाताओं ने आयरन लेडी इरोम शर्मिला को सिर्फ 90 वोट दिया और वह चिनाव हार गईं उनकी पार्टी को भी सीटों के लिए तरसना पद गया।इसके बाद उन्होंने चुनाव न लड़ने का एलान कर दिया।इसके अलावा यहां बीजेपी पहली बार लड़ाई में दिखी और यहाँ भी मुकाबला बराबरी पर है।अन्य विजयी उम्मीदवार यहाँ की सरकार बनाने में अहम् किरदार निभाएंगे।

गोवा मणिपुर में हारे जीते दिग्गज नेता

कुल मिलाकर इन पांचों राज्यों के परिणामों पर नजऱ दौड़ाएं तो बीजेपी एक पंजाब छोड़कर हर जगह अपना डंका बजा चुकी है।यह जीत बीजेपी की नहीं नमो की है।जीत के कारणों में दल बदलू नेताओं की ताकत भांप कर टिकट देना, घर के अंदर के विद्रोह को समय रहते दबा देना,रूठों को मनाना,जनता के नब्ज को समझना,नोटबंदी और सर्जिकल स्ट्राइक जैसे महत्वपूर्ण और कठोर फैसले लेना,सीएम कैंडिडेट की जगह पीएम के फेस पर चुनाव लड़ना,तुष्टिकरण की जगह विकास,धर्म और जाति का बेजोड़ समीकरण,मुस्लिम वोटों का बिखराव,समाजवादियों की लड़ाई और कांग्रेस से गठबंधन के साथ मायावती के छत्रपों को तोड़ने के साथ नोटबंदी के बाद लगे आरोप जैसे असंख्य कारण बीजेपी को जीत दिलाने में सफल रहे।लेकिन इन सब के अलावा जो एक सबसे बड़ा कारण था वह था प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम।

मणिपुर में जनता का मत।

#बवाल_विजय

Vijay Rai
Human by Birth,Hindu by Religion,Indian by Nationality,Politics is my choice,journalism-my passion.

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.