उत्तरप्रदेश चुनावों के प्रचार के लिए कल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रैली करने पहुंचे थे। इस रैली में भी उन्होंने हमेशा की तरह अपने अंदाज़ में विरोधियों पर हमले बोले लेकिन जो नयापन था वह था विरोधी के अस्त्र से उसी पर प्रहार। कल जब प्रधानमंत्री ने बोलना शुरू किया तो एहसास होने लगा,आज कुछ नया होना है। हुआ भी यही पूर्वांचल की भोजपुरी मिठास वाली भूमि पर प्रधानमंत्री ने बहुत ही सहज लहजे में अपनी बात शुरू करते हुए कहा मेरी अखिलेश जी नहीं मानते लेकिन अपनी तो मानेंगे? जनता ने भी उत्साह और जोश में आकर प्रधानमंत्री के समर्थन में हाँ कहा। इसके बाद दौर शुरू हुआ सरल मुस्कान के साथ अखिलेश पर गंभीर हमले का। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में यूपी सरकार की आधिकारिक वेबसाइट up.gov.in का जिक्र करते हुए उसपर दिए आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि यूपी में जीवन छोटा और अनिश्चित है। यहाँ कब मर जाएँ कोई भरोसा नहीं है। यह मै नही कह रहा न ही यमराज की कोई चिट्ठी आई है। यह तो अखिलेश जी की वेबसाइट कहती है? वेबसाइट पर कारनामे बोल रहे हैं और अखिलेश छः महीने से कह रहे हैं कि काम बोलता है। आगे बोलते हुए मोदी ने वेबसाइट की एक लाइन को दुहराते हुए कहा कि यूपी की हालत सहारा के रेगिस्तान जैसी है और इसके बाद जो इस पूरे हमले की सबसे एक्सक्लूसिव बात थी मोदी ने वो कह डाली । उन्होंने कहा मेरे भाषण के बाद अफसरों पर गाज गिरेगी।

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प्रधानमंत्री द्वारा बताई गईं सपा सरकार की उपलब्धि 

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अखिलेश यादव

इसके बाद उन्होंने राहुल के साथ हावर्ड वालों को जमकर खरी-खोटी सुनाई। मोदी ने अपने हार्डवर्क के साथ जनता के परिश्रम की बात भी बताई। यह तो हो गई कल की रैली की बात अब आज की ताज़ातरीन खास खबर जो इस रैली से जुडी हुई है।

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सपा सरकार के काम और कारनामे 

मोदी ने अपने भाषण में जो अफसरों पर गाज गिरने की बात कही थी वो सच साबित होती दिख रही है। आज उत्तरप्रदेश सरकार की वेबसाइट अंडर कंस्ट्रक्शन हो गई है और अधिकारी शायद अंडर सस्पेंसन। खैर मुद्दे की बात यह है कि काम बोल रहे हैं और वो भी चिल्ला चिल्ला कर बताये भी जा रहे हैं लेकिन अपनी ही सरकार की तारीफ़ करने वाले अखिलेश जी का ध्यान इन कारनामों पर क्यूँ नहीं गया?मोदी जी इस बार सही पकड़े हैं और अखिलेश जी यह तो कारनामे का साबुत दे दिया आपने! राहुल गांधी के साथ रहने का असर है शायद क्योंकि हमारे यहाँ कहावत है “संगत से गुण आत है संगत से गुण जात” अब देखना है गुण आते हैं या कुर्सी जाती है?

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आज वेबसाइट से गायब है आर्थिक सेक्शन